Wednesday, 9 September, 2026
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पुरस्कृत कलाकार खुले आसमान के नीचे...अतिक्रमण’ बताकर सील किया भवन आम के पेड़ के नीचे चल रहा प्रशिक्षण....प्रशासन क्यों चुप? #Kanker #TerracottaArt #ChhattisgarhNews #LocalIssue #Handicraft
पुरस्कृत कलाकार खुले आसमान के नीचे...अतिक्रमण’ बताकर सील किया भवन आम के पेड़ के नीचे चल रहा प्रशिक्षण....प्रशासन क्यों चुप? #Kanker #TerracottaArt #ChhattisgarhNews #LocalIssue #Handicraft

आम के पेड़ तले गढ़ रहा भविष्य: बांसला में राज्यस्तरीय शिल्पकार की कार्यशाला सील

कांकेर। छत्तीसगढ़ की माटी को जीवंत आकृतियों में ढालने वाले राज्यस्तरीय पुरस्कृत टेराकोटा शिल्पकार परमेश्वर चक्रधारी इन दिनों खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं। कांकेर जिले की ग्राम पंचायत बांसला में उनकी कार्यशाला को ‘अतिक्रमण’ बताते हुए सील कर दिया गया है, जिससे 50 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आम के पेड़ के नीचे संचालित हो रहा है।

परमेश्वर चक्रधारी को वर्षों पहले तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ अंकित आनंद के प्रयासों से एक कार्यशाला भवन आवंटित किया गया था। कलाकार का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए उन्होंने पंचायत से मरम्मत की अनुमति मांगी। फंड उपलब्ध न होने की जानकारी मिलने पर ग्राम सभा से विधिवत एनओसी और प्रस्ताव पारित कर स्वयं के व्यय से मरम्मत कराने की प्रक्रिया शुरू की। उनके पास पूर्व सरकार के समय का वैध पट्टा होने का भी दावा है।

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आरोप है कि वर्तमान सरपंच जमुना तिरसुनिया ने भवन को शासकीय अतिक्रमण बताते हुए नोटिस जारी कर 15 जनवरी को कार्यशाला सील कर दी और सामान बाहर निकलवा दिया। कलाकार का कहना है कि उन्होंने एसडीएम भानुप्रतापपुर और तहसीलदार को आवेदन दिया, पर सुनवाई नहीं हुई।

खुले में प्रशिक्षण, जोखिम में कलाकृतियां

विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड, कोंडागांव द्वारा आयोजित 50 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर अब आम के पेड़ के नीचे चल रहा है। कोलकाता से आए डिजाइनर कौशिक घोष और प्रशिक्षक परमेश्वर चक्रधारी 20 प्रशिक्षार्थियों को मिट्टी कला की बारीकियां सिखा रहे हैं।

प्रशिक्षार्थियों-कनेश देहारी, टीना, जया, लीलेश और अंजू चक्रधारी-का कहना है कि कार्यशाला सील होने से उन्हें असुविधा हो रही है, लेकिन कला सीखने के जज्बे के कारण वे कठिन परिस्थितियों में भी प्रशिक्षण ले रहे हैं। खुले में रखी कलाकृतियों और सामग्री के खराब होने का खतरा बना हुआ है।

विवाद या बदले की राजनीति?

ग्रामीणों के अनुसार विवाद की जड़ पंचायत और कलाकार के बीच कथित व्यक्तिगत मतभेद हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या कला और संस्कृति को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों की नहीं है? जिस कार्यशाला से गांव की पहचान बनी, उसी पर ताला लगना कई सवाल खड़े करता है।

प्रशासन की चुप्पी

इस कार्यशाला का दौरा पूर्व में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने किया था और कला की सराहना की थी। अब जब प्रशिक्षण शिविर खुले में संचालित हो रहा है, तो प्रशासन की चुप्पी चर्चा का विषय है। ग्रामीणों में रोष है कि एक सम्मानित कलाकार को इस तरह की परिस्थितियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है।

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About Prakash Thakur

प्रकाश ठाकुर, पेज 16 न्यूज़ के मुख्य संपादक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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