84 वर्षीय शिक्षक ने कहा–यह सम्मान हृदय को छू गया
कांकेर:- शिक्षक दिवस के अवसर पर समाजसेवी संगठन जन सहयोग ने गुरुजनों के सम्मान की एक संवेदनशील और अनुकरणीय पहल की। संगठन के सदस्यों ने तीन वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षकों के निवास पर पहुंचकर उनका सम्मान किया और उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
‘जन सहयोग’ के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक को राष्ट्र निर्माता माना गया है और उनका स्थान माता-पिता के समान सम्माननीय है। उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा शिक्षक दिवस पर पूर्व में भी गुरुजनों का सम्मान किया जाता रहा है और भविष्य में भी यह परंपरा जारी रखने का प्रयास रहेगा।
84 वर्षीय शिक्षक आज भी दे रहे शिक्षा
सम्मानित शिक्षकों में सेवानिवृत्त अंग्रेजी शिक्षक सैयद जुल्फिकार अली की प्रतिक्रिया ने कार्यक्रम को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र 84 वर्ष है, लेकिन इसके बावजूद वे आज भी बच्चों को पढ़ाने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे शिक्षकीय जीवन के बावजूद उन्हें पहले कभी सम्मान नहीं मिला, ऐसे में ‘जन सहयोग’ द्वारा घर पहुंचकर किया गया सम्मान उनके लिए बेहद भावुक क्षण है। उन्होंने संगठन के सदस्यों को आशीर्वाद देते हुए समाज सेवा के कार्यों की सराहना की।
अस्वस्थ सेवानिवृत्त प्राचार्य का भी घर पहुंचकर सम्मान
जन सहयोग की टीम ने सेवानिवृत्त प्राचार्य बहादुर लाल तिवारी के निवास पर पहुंचकर उनका सम्मान किया। बताया गया कि वे वर्तमान में अस्वस्थ चल रहे हैं। संगठन द्वारा घर पहुंचकर सम्मान किए जाने से उनके परिजनों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की।
इसी क्रम में वरिष्ठ शिक्षक भगवानजी भाई टांक का भी अभिनंदन किया गया। सम्मान से अभिभूत टांक ने कहा कि ‘जन सहयोग’ और अजय पप्पू मोटवानी द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य सराहनीय हैं। उन्होंने संगठन के सदस्यों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस सम्मान ने उन्हें अपने बचपन के गुरुजनों की याद दिला दी।
सादगी में दिखा सम्मान का भाव
कार्यक्रम में अजय पप्पू मोटवानी के साथ राजकुमार फव्यानी, अनुराग उपाध्याय, डॉ. श्याम देव, धर्मेंद्र देव, जितेंद्र प्रताप देव, प्रवीण गुप्ता, शैलेंद्र देहारी, दिलीप कुमार गंजीर, वसंत ठाकुर सहित अन्य वरिष्ठजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सम्मान के लिए किसी भव्य मंच या औपचारिक आयोजन के बजाय टीम स्वयं गुरुजनों के घर पहुंची। इस पहल को शहरवासियों द्वारा गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की मानवीय परंपरा के रूप में सराहा जा रहा है। जन सहयोग’ की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सम्मान के लिए मंच बड़ा होना जरूरी नहीं, भावनाएं सच्ची होना जरूरी है।
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