तीनों समुदायों ने मिलकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कांकेर:- पर्यावरण संरक्षण की पहल को सामाजिक एकता और सद्भाव से जोड़ते हुए कांकेर की समाजसेवी संस्था जन सहयोग ने रविवार, 9 अगस्त को शहर के मुक्तिधाम और मुस्लिम एवं ईसाई कब्रिस्तान में पौधारोपण कर एक अनूठी पहल की शुरुआत की।
संस्था ने वन विभाग के सहयोग से तीनों स्थानों पर फलदार और फूलदार पौधे रोपे। इस पहल की खास बात यह रही कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों के अंतिम संस्कार स्थलों पर समाजसेवियों ने एक साथ पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक एकता का संदेश दिया।
अंतिम संस्कार स्थलों को भी हराभरा बनाने की पहल
जन सहयोग के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने विभिन्न समाज प्रमुखों के समक्ष अंतिम संस्कार स्थलों पर पौधारोपण का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव को सभी समुदायों की सहमति मिलने के बाद 9 अगस्त को सामूहिक पौधारोपण के लिए चुना गया।
रविवार को कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7 बजे मनकेशरी स्थित ईसाई कब्रिस्तान से हुई। इसके बाद अन्नपूर्णापारा स्थित मुस्लिम कब्रिस्तान और फिर लगभग 9 बजे सनातन धर्म के मुक्तिधाम में पौधारोपण किया गया।
धर्म अलग, प्रकृति एक–साथ आए समाज
मुस्लिम कब्रिस्तान में अंजुमन कमेटी के अध्यक्ष जावेद मेमन सहित समाज के अन्य सदस्यों ने पौधारोपण में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने जन सहयोग की पहल की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।
ईसाई समाज की ओर से नीरज जोफर, डॉ. प्रदीप क्लाडियस और आकाश राव सहित अन्य लोगों ने पौधारोपण में भाग लिया।
वहीं जन सहयोग की टीम की ओर से अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी के साथ धर्मेंद्र देव, जितेंद्र प्रताप देव, दिलीप गंजीर, अखिलेश साहू, आशुतोष देव, शैलेंद्र देहारी,दीपक देहारी और सागर देव सहित समाजसेवियों ने सहभागिता की।
वन विभाग का भी मिला सहयोग
पौधारोपण अभियान में वन विभाग के कर्मचारियों ने भी सहयोग किया। विभाग की ओर से अरुण नेताम, विमल ठाकुर, चैनसिंह वट्टी, मनोज साहू, हेमलता शोरी, पुनेश यादव, चेतन पवार, हिमालय खड़हा, सुरेखा नेताम, शेष कुमार नेताम, राजवीर दुग्गा, छबीला नेताम, लोकेंद्र सिन्हा, तिहारीन कवाची और पुष्पलता भंडारी सहित अन्य कर्मचारियों ने सहभागिता की।
‘जहां अंतिम विदाई, वहां भी हरियाली‘
जन सहयोग के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने कहा कि अंतिम संस्कार स्थल केवल विदाई के स्थान नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान भी हैं। ऐसे स्थानों पर पौधारोपण से आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल को एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे निरंतर जारी रखने का प्रयास किया जाएगा, ताकि शहर के ऐसे स्थान भी हरियाली और फूलों से गुलजार हो सकें।
कांकेर में शुरू हुई यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, धार्मिक एकता और मानवीय संवेदना का भी संदेश देती नजर आई। अंतिम विदाई के स्थानों पर जीवन और हरियाली का प्रतीक पौधा लगाकर समाजसेवियों ने प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया।
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