आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त पर गंभीर आरोप, शिवसेना ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कांकेर:- आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा, छात्रावासों की बदहाल व्यवस्था और आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कांकेर जिले में एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की दुर्गूकोंदल इकाई ने छात्रावासी छात्रा की मौत के मामले में सूक्ष्म जांच की मांग उठाते हुए तहसीलदार के माध्यम से कलेक्टर कांकेर को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद संगठन ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए दुर्गूकोंदल बाजार चौक में पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया।
शिवसेना ने वर्तमान में पदस्थ सहायक आयुक्त पर कथित निरंकुशता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का आरोप है कि जिले के आश्रमों, छात्रावासों, एकलव्य विद्यालयों और आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है, लेकिन शिकायतों और घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
छात्रा की मौत पर सूक्ष्म जांच की मांग
शिवसेना के अनुसार, दुर्गूकोंदल स्थित सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में हाल ही में एक छात्रावासी छात्रा द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना सामने आई थी। संगठन ने इस घटना को गंभीर बताते हुए इसके सभी पहलुओं की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस संबंध में तहसीलदार दुर्गूकोंदल के माध्यम से कलेक्टर कांकेर को ज्ञापन सौंपा गया। संगठन का कहना है कि आवासीय विद्यालयों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और निगरानी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसलिए घटना की परिस्थितियों, संस्थान की व्यवस्था और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
पुतला दहन कर सहायक आयुक्त के खिलाफ खोला मोर्चा
छात्रा की मौत के मामले में ज्ञापन सौंपने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने दुर्गूकोंदल बाजार चौक में आदिवासी विकास विभाग कांकेर के सहायक आयुक्त का पुतला दहन किया।
प्रदर्शन के दौरान संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आश्रमों, छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों के संचालन, रखरखाव, खाद्यान्न, दवाइयों और अन्य जरूरी संसाधनों के लिए करोड़ों रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
शिवसेना ने इन व्यवस्थाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित सप्लायरों की भूमिका की पड़ताल करने की मांग की है।
छात्रावासों में हुई घटनाओं का हवाला, विभागीय जवाबदेही पर सवाल
शिवसेना ने अपने ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिले के अलग-अलग छात्रावासों और आवासीय संस्थानों में सामने आई घटनाओं का उल्लेख किया। संगठन ने कांकेर प्रयास आवासीय विद्यालय में छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, छात्रावास में मारपीट की घटना, अंतागढ़ ब्लॉक के सरांडी छात्रावास में बीमार छात्र की मौत और मरदापोटी सहित अन्य छात्रावासों में मलेरिया से विद्यार्थियों की मौत के मामलों को उठाया। संगठन ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद भी जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई करने में गंभीर कमी रही है।
जुलाई 2026 में कांकेर जिले के छात्रावासों में मलेरिया से बच्चों की मौत और अन्य विद्यार्थियों के संक्रमित पाए जाने की घटनाएं भी सार्वजनिक चर्चा में आई थीं। इन घटनाओं ने छात्रावासों में स्वास्थ्य निगरानी, समय पर उपचार और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए थे।
शिवसेना का कहना है कि छात्रावासों में रहने वाले आदिवासी बच्चों की सुरक्षा केवल विभागीय औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी है।
खाद्यान्न और सामग्री खरीदी में भी अनियमितता के आरोप
प्रदर्शन के दौरान शिवसेना ने एकलव्य आवासीय विद्यालय नरहरपुर और कांकेर में खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री की आपूर्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। संगठन का दावा है कि कुछ सप्लायरों के माध्यम से शासन द्वारा निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर सामग्री की आपूर्ति की जा रही है, जिससे सरकारी राशि को नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसके अलावा दवाइयों, कुर्सी-टेबल, मच्छरदानी, बर्तन, अलमारी, चादर, तकिया और दरी जैसी आवश्यक सामग्री की खरीदी में भी कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई। शिवसेना ने इन सभी खरीद प्रक्रियाओं के टेंडर, बिल, भुगतान रिकॉर्ड, सप्लाई रजिस्टर और वास्तविक सामग्री का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।
नाबालिग छात्राओं से जुड़े मामलों पर भी उठाए सवाल
शिवसेना ने अपने आरोपों में छोटेबेठिया कन्या आवासीय विद्यालय और भानुप्रतापपुर के छात्रावास से जुड़े नाबालिग छात्राओं की गर्भावस्था के मामलों का भी उल्लेख किया। संगठन ने इन घटनाओं की परिस्थितियों, संस्थागत सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की जांच की मांग की है। ऐसे संवेदनशील मामलों में संबंधित बालिकाओं की निजता और पहचान की सुरक्षा के साथ निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
सरकार से कार्रवाई की मांग, आंदोलन विस्तार की चेतावनी
शिवसेना का कहना है कि आदिवासी विद्यार्थियों के नाम पर मिलने वाली सरकारी राशि का वास्तविक लाभ बच्चों तक पहुंचना चाहिए। यदि भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और शैक्षणिक संसाधनों में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
संगठन ने वर्तमान सहायक आयुक्त के कार्यकाल में सामने आई शिकायतों और घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने, सप्लायरों के साथ कथित मिलीभगत की पड़ताल करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिवसेना ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से मांगों पर ठोस पहल नहीं की गई, तो संगठन अपने आंदोलन का विस्तार करेगा।
अब प्रशासन के सामने जवाबदेही की चुनौती
कांकेर जिले के आश्रमों और छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और संसाधनों की उपलब्धता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शिवसेना का यह प्रदर्शन प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन गया है।
हालांकि, सहायक आयुक्त पर लगाए गए भ्रष्टाचार, मिलीभगत और संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी और विभाग का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।
सवाल अब सिर्फ पुतला दहन या राजनीतिक विरोध का नहीं है। सवाल उन आदिवासी बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों का है, जो बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लेकर सरकारी आश्रमों और छात्रावासों में रहते हैं।
यदि सरकारी योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो उसका असर बच्चों की थाली, इलाज, सुरक्षा और पढ़ाई में भी दिखाई देना चाहिए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच व कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाता है। ज्ञापन सौंपने और पुतला दहन के दौरान चैनूराम सिवाना, सुखचंद मंडावी, योगेश नुरेटी, मनकुर उईके, संपत सिन्हा, तामेष गावड़े सहित शिवसेना के अन्य कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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