बॉन्डेड यूजी-पीजी डॉक्टरों का दावा–कई मांगों पर अभी सिर्फ आश्वासन
कांकेर:-17 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा जूनियर डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात और सरकार की ओर से कुछ मांगों पर लिखित आदेश जारी होने के बाद समाप्त करने की घोषणा कर दी गई है। आंदोलन खत्म होने के साथ ही जहां सरकार और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की बातचीत को समाधान की दिशा में कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन में शामिल कुछ डॉक्टरों के बीच असंतोष के स्वर भी सामने आने लगे हैं।
दरअसल, आंदोलन में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, बॉन्डेड यूजी डॉक्टर और बॉन्डेड पीजी डॉक्टर शामिल रहे। डॉक्टरों के अनुसार वेतन विसंगति सहित चार प्रमुख मुद्दे आंदोलन के केंद्र में थे। इनमें इंटर्न और पीजी रेजिडेंट से संबंधित वेतन मांगों पर आदेश जारी होने की बात कही जा रही है, जिसे लेकर संबंधित डॉक्टरों ने संतोष व्यक्त किया है,लेकिन आंदोलन की समाप्ति के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा बॉन्डेड यूजी और बॉन्डेड पीजी डॉक्टरों की मांगों को लेकर हो रही है।
कुछ मांगों पर आदेश, कुछ पर अभी आश्वासन
बॉन्डेड डॉक्टरों का कहना है कि उनकी कई मांगों को लेकर अभी सरकार की ओर से स्पष्ट लिखित आदेश सामने नहीं आया है। उनके अनुसार, उन्हें मांगों पर विचार और कार्रवाई का आश्वासन जरूर मिला है, लेकिन आंदोलन वापस लेने से पहले उनकी अपेक्षा थी कि संबंधित मांगों को लेकर स्पष्ट आदेश या निश्चित समयसीमा जारी की जाती….यही अंतर अब आंदोलन की समाप्ति के बाद असंतोष का कारण बन रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि आंदोलन में अलग-अलग श्रेणियों के डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से अपनी समस्याएं रखी थीं, तो सभी वर्गों की मांगों की वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।
आंदोलन वापस लेने के तरीके पर भी सवाल
आंदोलन खत्म होने के बाद कुछ जिलों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों की ओर से संगठनात्मक निर्णय की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। असंतुष्ट डॉक्टरों का आरोप है कि उनकी पर्याप्त रायशुमारी के बिना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
हालांकि यह संगठनात्मक प्रक्रिया को लेकर संबंधित डॉक्टरों का दावा है, इसलिए इसकी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एसोसिएशन के सभी संबंधित पक्षों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। डॉक्टरों का कहना है कि आंदोलन में सभी वर्गों ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी, ऐसे में आंदोलन समाप्त करने का निर्णय भी सभी वर्गों की सहमति और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए था।
दो साल की सेवा, फिर भी वेतन अंतर का सवाल
बॉन्डेड डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद बॉन्ड के तहत सेवा के दौरान उन्हें कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक वे लगभग दो वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन अलग-अलग श्रेणियों के डॉक्टरों के बीच वेतन में अंतर अब भी बना हुआ है,इसी वेतन विसंगति और सेवा से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर उन्होंने आंदोलन में अपनी मांगें रखीं।
बॉन्डेड डॉक्टरों का कहना है कि उनकी अपेक्षा केवल आश्वासन तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय ले और उसे लिखित रूप में लागू करने की दिशा में कदम उठाए।
आंदोलन खत्म, लेकिन आवाज उठाने का सिलसिला जारी रखने की बात
संगठन स्तर पर आंदोलन समाप्त करने की घोषणा हो चुकी है, लेकिन असंतुष्ट डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों के समाधान तक वे अपने स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखना, सरकार तक मांगें पहुंचाना और मांगों के संबंध में लिखित आदेश की मांग करना आगे भी जारी रहेगा। इससे साफ है कि आंदोलन का औपचारिक रूप से समाप्त होना जरूरी नहीं कि सभी डॉक्टरों की चिंताओं के समाप्त होने का संकेत हो।
अब सरकार के अगले कदम पर नजर
पूरे घटनाक्रम में एक तरफ स्वास्थ्य मंत्री के साथ बातचीत के बाद कुछ मांगों पर लिखित आदेश जारी होने और आंदोलन खत्म होने की घोषणा हुई है, वहीं दूसरी तरफ बॉन्डेड यूजी और बॉन्डेड पीजी डॉक्टरों की ओर से कई मांगों पर अभी स्पष्ट आदेश नहीं मिलने की बात कही जा रही है,यही स्थिति अब पूरे मामले को नया मोड़ दे रही है।
आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन बॉन्डेड डॉक्टरों की मांगें किस समयसीमा में पूरी होंगी, किन मांगों पर सरकार ने निर्णय लिया है और किन पर अभी प्रक्रिया जारी है—इसकी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।
अब निगाहें सरकार और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अगले कदम पर हैं। क्योंकि आंदोलन की समाप्ति के बाद भी यदि किसी वर्ग की मांगें लंबित रहती हैं, तो उन मांगों पर स्पष्ट रोडमैप और लिखित निर्णय ही आगे की स्थिति को तय करेगा।
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