कानूनों की अनदेखी का आरोप, आदिवासी नेता कोमल हुपेण्डी ने जताई कड़ी आपत्ति
कांकेर:-जिले में प्रस्तावित गोदावरी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड की जनसुनवाई को लेकर विवाद तेज हो गया है।
आदिवासी समाज ने घोषणा की है कि वे आगामी 13 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई का पूरी तरह विरोध करेंगे।
उनका आरोप है कि कंपनी ने जनसुनवाई से पहले ही 5000 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई कर दी है और शासन के पर्यावरणीय नियमों, पेसा कानून व वनाधिकार कानून का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
“जनसुनवाई सिर्फ दिखावा, असल में जारी है लूट”-कोमल हुपेण्डी
आदिवासी नेता कोमल हुपेण्डी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि —
“गोदावरी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड शासन के सारे नियम, कानूनों और पर्यावरणीय मापदंडों की धज्जियां उड़ा रही है।
कंपनी जनसुनवाई का नाटक कर रही है जबकि असल में उसने पहले ही 5000 से अधिक पेड़ कटवा दिए हैं।”
हुपेण्डी ने आगे कहा कि बस्तर संभाग पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून और वनाधिकार कानून पूरी तरह लागू है।
इसके बावजूद कंपनी द्वारा इन कानूनों की अनदेखी करते हुए आदिवासी जल, जंगल और जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है।
आदिवासी समाज एकजुट, विरोध की तैयारी
आदिवासी संगठनों ने कहा कि चाहे सरगुजा हो या बस्तर -आदिवासी समाज हमेशा अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्षरत रहा है।
कांकेर में गोदावरी इस्पात कंपनी के खिलाफ भी यही संघर्ष अब तेज़ होने जा रहा है।
जनसुनवाई के दौरान आदिवासी समाज कंपनी की “दादागिरी” और “लूट की मंशा” के खिलाफ सामूहिक विरोध प्रदर्शन करेगा।
हुपेण्डी ने चेतावनी दी कि-
“आदिवासी समाज गोदावरी इस्पात कंपनी के षड्यंत्र को भलीभांति जानता है।
कंपनी की मंशा को कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा।
13 नवंबर की जनसुनवाई में कंपनी के खिलाफ आदिवासी समाज एकजुट होकर खड़ा होगा।”
Live Cricket Info
Page16 News Khabar Wahi Jo Sach Ho!
