कांकेर:-अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर कांकेर जिले में वन विभाग के तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संतुलन, नदी-तालाबों के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जैव विविधता संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए लोगों से प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
इस अवसर पर अजय पप्पू मोटवानी ने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से कांकेर की जीवनरेखा मानी जाने वाली दूध नदी और शहर के ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था वर्षों से स्वच्छता और जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही है, लेकिन जनसहभागिता के बिना इस अभियान को पूरी सफलता नहीं मिल सकती।
उन्होंने नागरिकों और व्यापारियों से अपील करते हुए कहा कि घरों और दुकानों का कचरा नदी-तालाबों में फेंकने के बजाय नगर पालिका के कचरा वाहनों को दिया जाए। उनका कहना था कि लगातार सफाई के बावजूद दोबारा कचरा जमा होने से प्रयासों का प्रभाव कम हो जाता है और प्राकृतिक जल स्रोत प्रदूषित होते हैं।
कार्यक्रम में डॉ शैलेंद्र सिंह, समाजसेवी प्रवीण गुप्ता, सहित वन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक व ग्रामीण उपस्थित रहे।
वन विभाग के अधिकारियों ने भी जैव विविधता संरक्षण, वन संपदा की सुरक्षा और जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और ग्रामीणों को पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने तथा पौधरोपण एवं स्वच्छता गतिविधियों में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश देकर लोगों को प्रकृति और जैव विविधता की रक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी बना।
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