Breaking News
कांकेर, कोरर, वन विभाग, छत्तीसगढ़, कांकेर वन मंडल, वन विभाग भ्रष्टाचार, सरकारी भ्रष्टाचार, विभागीय मिलीभगत, सरकारी राशि गबन, फर्जी भुगतान, भ्रष्टाचार जांच, आरटीआई खुलासा, माओवादी से आत्मसमर्पण, जग्गू गोटा, सुखदेव डीवीसीएम, कुऐमारी एरिया कमेटी, बस्तर, वन विभाग की मनमानी, भ्रष्ट अधिकारी, जनता का टैक्स, सरकारी लापरवाही, एसडीओ कोरर, वन मंत्री केदार कश्यप, छत्तीसगढ़ प्रशासन, सुशासन, सरकारी गबन मामला, कोरर परिक्षेत्र, कांकेर समाचार, Chhattisgarh News, Kanker News, Forest Department Corruption, Bastar News, RTI Report, Government Scam, Forest Scam, Inquiry Pending, Departmental Negligence,
कांकेर, कोरर, वन विभाग, छत्तीसगढ़, कांकेर वन मंडल, वन विभाग भ्रष्टाचार, सरकारी भ्रष्टाचार, विभागीय मिलीभगत, सरकारी राशि गबन, फर्जी भुगतान, भ्रष्टाचार जांच, आरटीआई खुलासा, माओवादी से आत्मसमर्पण, जग्गू गोटा, सुखदेव डीवीसीएम, कुऐमारी एरिया कमेटी, बस्तर, वन विभाग की मनमानी, भ्रष्ट अधिकारी, जनता का टैक्स, सरकारी लापरवाही, एसडीओ कोरर, वन मंत्री केदार कश्यप, छत्तीसगढ़ प्रशासन, सुशासन, सरकारी गबन मामला, कोरर परिक्षेत्र, कांकेर समाचार, Chhattisgarh News, Kanker News, Forest Department Corruption, Bastar News, RTI Report, Government Scam, Forest Scam, Inquiry Pending, Departmental Negligence,

कांकेर वन विभाग में फर्जीवाड़ा उजागर-बिना काम के 76 हजार रुपये का भुगतान,

“सुशासन” के दावों पर उठे सवाल

कांकेर।:- “भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे”-यह दावा था सुशासन की सरकार का।

लेकिन कांकेर वन विभाग के कोरर परिक्षेत्र से जो मामला सामने आया है, उसने इस दावे की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।

एक जिंदा और शिक्षित किसान के नाम पर फर्जी बिल बनाकर ₹76,000 की राशि का भुगतान कर दिया गया -वह भी बिना किसी कार्य के।

कागज़ों में हुआ काम, ज़मीन पर नहीं दिखा कुछ

सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार,

कोरर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत उप वन परिक्षेत्र बैजनपुरी (कक्ष क्र. OA/1540 हरनपुरी) में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण कार्य के तहत पौधरोपण के लिए मिट्टी और रेत खरीदी का रिकॉर्ड दर्ज है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

दस्तावेज़ों में दिखाया गया-

“रतनु ट्रांसपोर्ट” नामक फर्म से 50 ट्रिप मिट्टी और 30 ट्रिप रेत की आपूर्ति ली गई,

और इसके बदले 76,000 का नगद भुगतान किया गया।

परंतु Page16_News की टीम द्वारा की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग में पता चला कि यह पूरा बिल फर्जी था।


“मैंने कोई रेत नहीं दी, बिल फर्जी है”-किसान का खुलासा

जब हमारी टीम ने “रतनु ट्रांसपोर्ट” नामक फर्म के संचालक रतनु नेताम से बात की,

तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया —

“मैं एक शिक्षित किसान हूँ। मेरा ट्रैक्टर केवल खेती में काम आता है।

बिल में जो वाहन नंबर है, वह मेरे ट्रैक्टर से मिलता-जुलता है, लेकिन वह मेरा वाहन नहीं है।

मैंने कभी वन विभाग को रेत या मिट्टी नहीं बेची, और न ही कोई भुगतान लिया।”

किसान ने साफ तौर पर कहा कि यह फर्जी बिल के माध्यम से सरकारी धन के गबन का मामला है और इस पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

विभाग की चुप्पी, बढ़ते सवाल

जब Page16_News ने इस संबंध में कोरर वन परिक्षेत्र अधिकारी से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की,

तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से साफ इंकार कर दिया।

उनकी यह चुप्पी विभाग के भीतर छिपे भ्रष्टाचार पर और गहरे सवाल खड़े करती है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला कोई अपवाद नहीं है –

बल्कि वन विभाग में लंबे समय से फर्जी बिलों, कागज़ी पौधारोपण और नकद भुगतान के ज़रिए सरकारी धन के दुरुपयोग का सिलसिला जारी है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया-दोनों दलों में तकरार

कांकेर विधायक आशाराम नेताम (भाजपा) ने कहा-

“विष्णुदेव की सरकार में भ्रष्टाचारियों के लिए सिर्फ कालकोठरी है।

अगर बिना काम भुगतान हुआ है, तो पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों को जेल भेजा जाएगा।

मैं यह मुद्दा शीतकालीन विधानसभा सत्र में उठाऊँगा।”

वहीं भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी (कांग्रेस) ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा-

“भ्रष्टाचारियों को भाजपा सरकार का संरक्षण प्राप्त है।

सरकारी विभागों में खुलेआम गबन हो रहा है।

हम इस मामले को सदन में उठाकर निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।”

‘सुशासन’ के दावों पर धब्बा

कांकेर वन मंडल में यह पहला मामला नहीं है।

पिछले वर्षों में भी कैम्पा मद, वृक्षारोपण और क्षतिपूर्ति परियोजनाओं में अनियमितता और फर्जी भुगतान के कई आरोप लग चुके हैं।

अब यह नया खुलासा “सुशासन” के उस वादे पर गहरा प्रश्नचिन्ह लगा रहा है,

जहाँ कहा गया था कि भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटकाकर सीधा किया जाएगा।

Page16_News की विशेष जांच जारी

Page16_News की टीम ने इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज़ों, भुगतान रसीदों और बिलों की कॉपी अपने पास सुरक्षित रखी है।

टीम अब इस पूरे मामले से जुड़े और सबूत जुटाने में लगी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर सरकारी धन का यह गबन किस स्तर तक पहुंचा है और किन अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ।


 

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

About Prakash Thakur

प्रकाश ठाकुर, पेज 16 न्यूज़ के मुख्य संपादक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

Check Also

#HidmaEncounter, #BijapurNews, #NewDemocracyStatement, #FakeEncounterClaim, #Page16News,

हिड़मा एनकाउंटर पर बड़ा विवाद “मुठभेड़ नहीं, हिरासत में हत्या”

Follow Us बीजापुर:- देश के सबसे कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा की मौत को लेकर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *