आरोपियों के कब्ज्जे से BMW बाइक और आईफोन जब्त

चार आरोपी गिरफ्तार, BMW बाइक और iPhones जब्त।
पुलिस की यह कार्रवाई सायबर अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है — “डिजिटल फ्रॉड से बचना है, तो सावधान रहना है!” ⚠️
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कोण्डागांव पुलिस ने एक बड़े सायबर फ्रॉड मामले का पर्दाफाश किया है। देश के विभिन्न राज्यों में हुई करीब ₹72 लाख 9 हजार 424 रुपए की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी “म्यूल अकाउंट” के माध्यम से अवैध ट्रांजेक्शन कर कम समय में अधिक धन अर्जित करने की कोशिश कर रहे थे।
सायबर सेल कोण्डागांव को भारतीय सायबर अपराध पोर्टल (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) से एक प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था। इसमें बताया गया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोण्डागांव शाखा के खाता नंबर 5660383552 से संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए गए हैं। देशभर के 41 अलग-अलग राज्यों व शहरों से शिकायतें दर्ज की गईं। जांच में पता चला कि इस खाते से ₹72,09,424 की रकम अवैध रूप से ट्रांसफर की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस और एसडीओपी के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान पाया गया कि खाते का संचालन लोकेश हिरवानी और कामेश्वर नाग के नाम से किया जा रहा था, लेकिन वास्तव में इसे रविकांत साहू (25 वर्ष) और चंद्रशेखर नायक (25 वर्ष) — दोनों निवासी ग्राम सरोना, थाना सरोना, जिला कांकेर द्वारा उपयोग किया जा रहा था। दोनों आरोपियों को 7 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
नए आरोपियों की गिरफ्तारी
जांच आगे बढ़ने पर दो और आरोपी सामने आए –
परमेश मरकाम (21 वर्ष), निवासी ग्राम रांधना देवहरदुली, थाना फरसगांव
दसरू कांगे (18 वर्ष), निवासी ग्राम चांदाबेड़ा, थाना बड़े डोंगर, जिला कोण्डागांव
दोनों ने भी म्यूल खातों का उपयोग कर धोखाधड़ी से कमाई की थी। पुलिस ने उनके कब्जे से एक BMW बाइक, दो iPhone, पाँच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पासबुक, एटीएम कार्ड समेत कुल ₹7 लाख मूल्य के सामान जब्त किए हैं।
अपराध स्वीकार किया, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। इसके बाद उन्हें 23 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। कोण्डागांव पुलिस ने बताया कि इस मामले में और भी आरोपी शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान और लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। साथ ही, ट्रांजेक्शन के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि पूरी साजिश का खुलासा किया जा सके।
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