कांकेर:- समाज में मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए समाजसेवी संगठन जनसहयोग ने एक बार फिर ऐसा कार्य किया, जो इंसानियत के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भानुप्रतापपुर पुलिस के अनुरोध पर संगठन ने एक लावारिस शिशु के शव का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया।
संगठन के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी के नेतृत्व में की गई यह अंत्येष्टि जनसहयोग द्वारा अब तक किए गए 165वें लावारिस शव के अंतिम संस्कार के रूप में दर्ज हुई। शिशु का अंतिम संस्कार शाम 4 बजे दूध नदी के तट पर किया गया।
लावारिस शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करना जनसहयोग संगठन की सामाजिक सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। जिन लोगों का अंतिम संस्कार करने के लिए कोई अपना सामने नहीं आता, उनके लिए संगठन आगे आकर मानवीय जिम्मेदारी निभाता है।
लावारिस शिशु के शव की अंत्येष्टि भी इसी संवेदनशील पहल का हिस्सा रही। इस कार्य के माध्यम से संगठन ने संदेश दिया कि किसी व्यक्ति की अंतिम विदाई में भी मानवीय गरिमा और सम्मान सर्वोपरि हैं।
समाजसेवियों और पुलिसकर्मियों ने निभाई जिम्मेदारी
अंतिम संस्कार के दौरान जनसहयोग के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी के साथ दिलीप कुमार गंजीर, संजय कुंजाम, पप्पू साहू, शैलेंद्र देहारी, महेंद्र निषाद सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहयोग दिया।
वहीं, पुलिस विभाग की ओर से थाना प्रभारी अंबर सिंह भारद्वाज, उप निरीक्षक रामेश्वर चतुर्वेदी, आरक्षक शक्ति सिंह, नागेश साहू, एलएचसी उमित्रा मंडावी और आरक्षक अजय मंडावी सहित पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। पुलिस विभाग और जनसहयोग संगठन के समन्वय से संपन्न इस कार्य की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।
सेवा, संवेदना और सम्मान का संदेश
जनसहयोग की यह पहल बताती है कि सामाजिक सेवा केवल जरूरतमंदों की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी सम्मान देना है, जिनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने वाला कोई अपना मौजूद नहीं होता। 165 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार—यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन 165 अंत्येष्टियों के माध्यम से निभाई गई मानवीय जिम्मेदारी का प्रतीक है। जनसहयोग संगठन और पुलिस विभाग की यह संयुक्त पहल समाज को संवेदना, सेवा और मानवीय गरिमा का संदेश देती है।
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