कांकेर:- शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली दूध नदी को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए एक बार फिर समाजसेवी आगे आए हैं। जन सहयोग और अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्यों ने रविवार सुबह दूध नदी में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में कचरा हटाया।
कई घंटों तक चले इस अभियान के दौरान नदी किनारे और पानी के भीतर जमा प्लास्टिक, घरेलू कचरा, शराब की बोतलें और अन्य अपशिष्ट सामग्री निकाली गई। समाजसेवियों के अनुसार, नदी में फेंके जा रहे कचरे के कारण लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे नदी की स्वच्छता और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अभियान का नेतृत्व कर रहे अजय पप्पू मोटवानी ने कहा कि वर्ष 2014 से संस्था लगातार दूध नदी स्वच्छता अभियान चला रही है। उन्होंने शहरवासियों और दुकानदारों से अपील करते हुए कहा कि नदी में कचरा फेंकना बंद करें, ताकि सामूहिक प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि संस्था बिना किसी आर्थिक सहयोग या चंदे के लगातार श्रमदान कर रही है और इसका उद्देश्य केवल कांकेर को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आम नागरिक और व्यापारी थोड़ी जिम्मेदारी निभाएं, तो दूध नदी को पहले की तरह स्वच्छ और निर्मल बनाया जा सकता है।
अभियान में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के संगठन सचिव टी के जैन सहित कई पूर्व सैनिकों और युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। समाजसेवियों ने बरसात से पहले नदी की सफाई को और तेज करने की बात कही, ताकि जलभराव और प्रदूषण की समस्या कम हो सके।
इस दौरान स्थानीय नागरिकों ने भी नदी में श्रमदान कर रहे समाजसेवियों के प्रयासों की सराहना की और इसे शहर के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
दूध नदी स्वच्छता अभियान यह संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है। लगातार चल रहे इस श्रमदान ने एक बार फिर साबित किया है कि जागरूक नागरिक मिलकर अपने शहर और प्राकृतिक संसाधनों की तस्वीर बदल सकते हैं।
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