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भानुप्रतापपुर पुलिस ने नेटवर्क का खुलासा किया, फिर भी आबकारी विभाग चुप क्यों है❓
भानुप्रतापपुर पुलिस ने नेटवर्क का खुलासा किया, फिर भी आबकारी विभाग चुप क्यों है❓

अवैध शराब सप्लाई मामले में आबकारी विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल

कांकेर:- भानुप्रतापपुर पुलिस ने अवैध अंग्रेजी शराब सप्लाई के नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए शराब दुकान के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। लेकिन इस कार्रवाई के तीन दिन बीत जाने के बाद भी आबकारी विभाग द्वारा दुकान के चौकीदार, वाहन मालिक और मैनेजर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय मिलीभगत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शराब दुकान के मैनेजर के संरक्षण में गांव-गांव में कोचियों को अवैध रूप से अंग्रेजी शराब की सप्लाई की जा रही थी। लेकिन गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होना, प्रशासनिक संवेदनशीलता और विभागीय जवाबदेही पर सवाल उठाता है।

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इस मामले में आबकारी उपनिरीक्षक रेणुका मरकाम ने बताया था कि चौकीदार शराब अपने बच्चे के जन्म होने की खुशी में “नामकरण कार्यक्रम” के लिए ले जा रहा था। परंतु घटना के दिन ही चौकीदार की पत्नी की डिलीवरी हुई थी, ऐसे में उसी दिन नामकरण कार्यक्रम संभव होना तथ्यों के विपरीत दिखाई देता है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह बयान मामला कमजोर करने और वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश है।

इतनी मात्रा में शराब सामान्य घरेलू कार्यक्रम के लिए स्वीकार्य सीमा से कहीं अधिक मानी जाती है। सवाल यह है कि-क्या आबकारी विभाग के कर्मचारियों को नियमों से ऊपर होने का विशेष अधिकार है…?, बिना परमिट के इतनी मात्रा में शराब ले जाना कैसे “व्यक्तिगत उपयोग” मान लिया गया?

अवैध शराब सप्लाई में संरक्षण का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांव-गांव में हो रही अवैध सप्लाई के पीछे विभागीय संरक्षण की भूमिका साफ नजर आती है।

पुलिस कार्रवाई के बावजूद विभाग की चुप्पी से यह संदेह और गहरा हो गया है कि पूरे रेकैट में कुछ अधिकारी शामिल रहे हैं या उन्हें बचाया जा रहा है।

जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग तेज

इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच हो। गिरफ्तार कर्मचारी ही नहीं, बल्कि शराब दुकान का मैनेजर वाहन मालिक और संबंधित आबकारी अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। भानुप्रतापपुर में अवैध शराब सप्लाई का यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक उत्तरदायित्व, विभागीय पारदर्शिता और कानूनी व्यवस्था की साख का प्रश्न बन गया है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होगा, या मामला सिस्टम के गलियारे में ही दबा दिया जाएगा?

 

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About Prakash Thakur

प्रकाश ठाकुर, पेज 16 न्यूज़ के मुख्य संपादक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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