नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता
कांकेर:-नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर क्षेत्र में शांति की बहाली की दिशा में कांकेर पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक स्थित कामतेड़ा बीएसएफ कैंप में रावघाट एरिया कमेटी से जुड़े लगभग 60 इनामी माओवादियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया है। इस घटनाक्रम को नक्सल विरोधी अभियान के तहत अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
हथियारों के साथ आत्मसमर्पण
मिली जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े नक्सली नेता शामिल हैं, जिनमें उत्तर बस्तर डिवीजन के प्रभारी एसजेडसी राजमन उर्फ राजमोहन, राजू सलाम उर्फ शिवप्रसाद, और एसीएम मीना नेताम प्रमुख हैं। इन तीनों के नाम राज्य के मोस्ट वांटेड नक्सलियों की सूची में शामिल थे।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण में 18 पुरुष और 32 महिला नक्सलियों ने भाग लिया। सभी ने पुलिस के समक्ष AK-47, इंसास राइफल, LMG समेत कुल 39 घातक हथियार सरेंडर किए हैं।
राज्यभर में मची हलचल
इन शीर्ष नक्सल नेताओं के आत्मसमर्पण की खबर सामने आते ही पूरे राज्य में हलचल मच गई है। बस्तर रेंज के आईजी और कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को जिला मुख्यालय लाया जा रहा है। वहां मीडिया के समक्ष पूरी जानकारी साझा की जाएगी।
माओवाद को तगड़ा झटका
कामतेड़ा बीएसएफ कैंप में हुआ यह आत्मसमर्पण माओवादियों के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। रावघाट क्षेत्र, जो कि लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का गढ़ रहा है, वहां से इस तरह का सामूहिक आत्मसमर्पण यह संकेत देता है कि माओवाद अब अपने आखिरी दौर में है।
आपसी गुटबाज़ी और शांति वार्ता की विफलता
सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से माओवादियों के बीच गुटबाज़ी और विचारधारा को लेकर मतभेद चल रहे थे। समय-समय पर सरकार की ओर से शांति वार्ता की कोशिशें भी की गईं, लेकिन माओवादी गुटों के आंतरिक टकराव और हिंसा के रास्ते से पीछे न हटने के कारण वे असफल रहीं।
2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर का दावा होता दिख रहा सच
राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने 2026 तक बस्तर क्षेत्र को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। आज की इस बड़ी कार्रवाई के बाद यह दावा हकीकत में बदलता नजर आ रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह माओवादी लगातार मुख्यधारा से जुड़ते रहे तो आने वाले महीनों में छत्तीसगढ़ पूरी तरह से नक्सलवाद की छाया से बाहर आ सकता है।
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