उर्मिलेश देंगे लोकतांत्रिक भारत में पत्रकारिता की चुनौतियां पर व्याख्यान
रायपुर:- इस वर्ष का प्रतिष्ठित लोकजतन सम्मान बस्तर के जांबाज़ और पत्रकार मुकेश चंद्राकर को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें उनकी निर्भीक, ज़मीनी और कॉर्पोरेट-विरोधी पत्रकारिता के लिए मरणोपरांत दिया जा रहा है। ‘लोकजतन’ के संपादक बादल सरोज ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि यह सम्मान समारोह 24 जुलाई 2025 को रायपुर प्रेस क्लब में दोपहर 3 बजे आयोजित होगा।
गौरतलब है कि 1 जनवरी 2025 को पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या कर उनके शव को सेप्टिक टैंक में छुपा दिया गया था। लोकजतन ने यह सम्मान न केवल मुकेश की साहसिक पत्रकारिता को श्रद्धांजलि के रूप में दिया है, बल्कि यह भी रेखांकित किया है कि किस तरह सत्ता और कॉर्पोरेट गठजोड़ पत्रकारों पर हमले तेज़ कर रहे हैं, खासतौर पर बस्तर जैसे संवेदनशील इलाकों में।
‘लोकजतन’ का कहना है कि मुकेश ने उस कठिन समय में बस्तर में लोकतंत्र को जिंदा रखने की कोशिश की, जब क्षेत्र को माओवादी गतिविधियों का हवाला देकर संस्थागत दमन और लूट का ज़रिया बना दिया गया है। मुकेश ने स्थानीय सत्ता और कॉर्पोरेट गठजोड़ की बर्बरता को उजागर करने का कार्य किया, जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
यह सम्मान ‘लोकजतन’ के संस्थापक-संपादक शैलेन्द्र शैली की स्मृति में प्रतिवर्ष 24 जुलाई को उनके जन्मदिन पर दिया जाता है। अब तक इस सम्मान से देश के कई जुझारू पत्रकारों को नवाज़ा जा चुका है, जिनमें डॉ. राम विद्रोही, कमल शुक्ला, लज्जाशंकर हरदेनिया, अनुराग द्वारी, राकेश अचल, और पलाश सुरजन जैसे नाम प्रमुख हैं।
इस अवसर पर ‘शैलेन्द्र शैली व्याख्यानमाला’ की भी शुरुआत की जाएगी, जिसमें पहले व्याख्यान का विषय होगा लोकतांत्रिक भारत में पत्रकारिता की चुनौतियां। यह व्याख्यान प्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश (नई दिल्ली) द्वारा दिया जाएगा।
समारोह की अध्यक्षता करेंगे वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध, जबकि विशिष्ट अतिथि होंगे वरिष्ठ विधिवेत्ता और लेखक कनक तिवारी।
स्व. शैलेन्द्र शैली न केवल पत्रकार थे, बल्कि वे कवि, लेखक, चित्रकार, जननेता और राजनीतिक कार्यकर्ता भी थे। वे युवावस्था में ही आपातकाल में जेल गए और बाद में सीपीआई (एम) के सबसे युवा राज्य सचिव बने। छत्तीसगढ़ और बस्तर के कई जनांदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। उनके नेतृत्व और विचारों की झलक आज भी ‘लोकजतन’ के माध्यम से देखी जा सकती है।
बिना किसी सरकारी या कॉर्पोरेट विज्ञापन के 26 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रहा लोकजतन आज भी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनपक्षधर पत्रकारिता की मजबूत आवाज बना हुआ है।
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