कांकेर:- अब ये बात आईने की तरह साफ़ हो चुकी है कि भ्रष्टाचार मुक्त विष्णु के सुशासन में जो अधिकारी कर्मचारी जितना भ्रष्टाचार करेगा उसे उतने ही बड़े पदों में बैठाकर उपकृत किया जाएगा, जिसकी नजिर इन दिनों जिले के शिक्षा विभाग में नजर आ रही है जब अधिकारी पे ठेकेदार बन घोटाला के आरोप लगे तो उक्त अधिकारी को बचाने के जिले में बड़े पद पर पदस्थ दिया गया है ।
कांकेर शिक्षा विभाग में यह पहला वाकया नहीं है जब विभाग सवालों के घेरे में इसके पूर्व करोड़ों का फर्जी सप्लाई काण्ड, प्रधान पाठक पदोन्नित काण्ड, सेवानिवृत्त होने से पहले ही 94 शिक्षकों का प्रत्याशा में नियुक्ति का मामला ना ऐसे कितने दांस्ता विभाग में मौजूद है जो अब बाहर नहीं आ पाये है और जो मामले उजागर हुए उन मामलों में कार्यवाही के नाम पर बाबू हीरालाल पटेल को जेल, बाबू प्रकाश तिवारी पर निलंबन की कार्यवाही लेकिन उसी भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारी को अन्य जगह पर प्रमोशन है ।
भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे अधिकारी को प्रमोशन दे बचने का ताजा मामला इन दिनों दुर्गुकोंदल विकासखंड से उठा हुआ है जहाँ मुख्यमंत्री स्कुल जतन योजना में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप लगा स्थानीय ग्रामीण अर्धनग्न हो जाँच की मांग कर चुके है लेकिन उक्त आरोप में घिरे अधिकारी पे कार्यवाही के बजाय बकायदा बचाया जा रहा है ।
अधिकारी को बचाए जाने और मुख्यमंत्री जतन योजना में हुए भ्रष्टाचार के मामले में प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक़ इस बात की जानकारी मिलती है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में इस योजना से प्राथमिक एंव माध्यमिक शालाओं के जीर्णोद्धार करने के लिए दुर्गुकोंदल ब्लाक के खंड शिक्षा विभाग को लगभग 07 करोड़ की राशि आबंटित की गई थी लेकिन तत्कालीन अधिकारी ने उक्त कार्यों से कुछ कार्य स्थानीय जनप्रतिनिधयों को दे शेष कार्यों खुद ही ठेकेदार बन सिर्फ रंगरोगन कर अपने परिजन के नाम राशि आहरण कर लिया और जैसे ही सत्ता बदली तो मुख्यमंत्री स्कुल जनत योजना का भ्रष्टाचार भी बाहर आ जमकर प्रदर्शन और जांच की मांग होने लगी तो विभाग के हाथ पाँव फूलने लगे और आनन फानन में उक्त अधिकारी हटाते हुए सहायक संचालक बना जिला मुख्यालय में पदस्थ कर दिया गया और गठित जांच टीम दो दिवसीय प्रवास में रहकर स्कूलों का सिर्फ निरीक्षण कर बैरंग जांच के वापस लौट आई और ठेकेदार साहब जिला मुख्यालय में पदस्थ कर बचाने का हर सम्भव कोशिश की गई है ।
भ्रष्टाचार में भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का पहला मामला नहीं है जब इस तरह का खेल खेला जा रहा है बीते माह में जब शिक्षकों को पदोन्नति दी गई थी तब 94 शिक्षक में से कुछ शिक्षक स्थान को लेकर असहमति जता पदभार ग्रहण नहीं किया गया और बाद में उन्ही शिक्षकों को पद रिक्त नहीं होते हुए भी मोटी रकम लेकर प्रत्याशा में एकल-एकल आदेश दे स्कूलों प्रधान पाठक बना दिया गया और जब नव पदस्थ संयुक संचालक राकेश पांडे मामले को पकड़ा तो विभाग में बम फुट गया और मामले जाँच की गई तत्कालीन शिक्षा अधिकारी अन्य जिले अधिकारी बना मास्टर एलबी को रिलीव कर दिया गया और आदेश टाईप करने वाले बाबू पर सारा पाप मढ़ते हुए निलंबन की कार्यवाही तय कि गई ।
इस पुरे गड़बड़ झाले में आश्चर्य तब सामने आई जिस एलबी शिक्षक दोषी मना उसके मूल सस्था में वापस भेजा गया था उसे उच्च कार्यालय के आदेश पर पुन: उसी पद पर जिला कार्यालय में ज़िम्मेदारी दे दी गई ।
इन सब बातों और घटनाओं से एक बात साफ़ हो चली की विष्णु के सुशासन में भ्रष्टाचारियों को ऊची कुर्सी मिलेगी और मेहनतकश को सजा अब इस बात का इन्तजार रहेगा की दुर्गुकोंद्ल विकासखंड में मुख्यमंत्री जतन योजना ठेकेदार बन कार्य करने वाले अधिकारी पर कार्यवाही होगी या आने वाले दिनों में उन्हें किसी अन्य का शिक्षा अधिकारी और लुट की छुट दे दी जायेगी
आदिवासी नेता की चेतावनी
इस पूरे प्रकरण पर आदिवासी युवा नेता कोमल हुपेंडी ने कहा-
“भानुप्रतापपुर और दुर्गुकोंदल ब्लॉक में करोड़ों की राशि का आहरण हुआ, लेकिन जमीन पर काम नजर नहीं आता।
यह भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत है। यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण के साथा राजधानी तक पदयात्रा कर मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।”
प्रशासन की सफाई: जांच जारी
इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी रमेश निषाद ने Page16_news से बातचीत में बताया कि –
“मामले की जांच जारी है।
उक्त प्रकरण से संबंधित दस्तावेज मंगवाए जा रहे हैं।
जांच पूर्ण होने के पश्चात नियमानुसार कार्रवाई हेतु रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेजी जाएगी।”
अधिकारी के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि विभाग अब औपचारिक जांच प्रक्रिया में जुटा है, हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जांच की रफ्तार बेहद धीमी है और आरोपित अधिकारी मुख्यालय में पदस्थ रहते हुए जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
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