नोटिस और जवाब के बाद भी कार्रवाई लंबित,
कांकेर:- गलत काम करने वालों को उलटा लटकाकर सीधा कर देंगे…..सरकार की ओर से सत्ता में आने के बाद कही गई इस तरह की सख्त बातों के बीच अब कांकेर शिक्षा विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। सवाल यह नहीं कि विभाग ने शिकायत पर कार्रवाई शुरू की या नहीं-सवाल यह है कि जब शिकायत हुई, नोटिस जारी हुआ, जवाब लिया गया और जांच प्रतिवेदन उच्च कार्यालय तक पहुंच गया, तो अंतिम कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
मामला भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम कुर्री स्थित प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला का है, जहां 10 अगस्त को श्रावण मास के दौरान शाला परिसर में धार्मिक आयोजन किए जाने का मामला सामने आया था।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शाला प्रबंधन समिति द्वारा स्कूल में धार्मिक आयोजन किया गया, इस दौरान बच्चों की कांवड़ यात्रा निकाले जाने और स्कूल परिसर में जलाभिषेक किए जाने की बात सामने आई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने भानुप्रतापपुर के खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। मामला सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों के जरिए भी शिक्षा विभाग के संज्ञान में पहुंचा, इसके बाद विभाग ने मामले में जांच प्रक्रिया शुरू की।
नोटिस जारी हुआ, जवाब भी आया
मामले में खंड शिक्षा अधिकारी, भानुप्रतापपुर द्वारा शाला प्रबंधन समिति को नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर जवाब मांगा गया, बताया गया कि शाला प्रबंधन समिति ने अपने जवाब में स्कूल में धार्मिक आयोजन किए जाने की बात स्वीकार की और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने की बात कही, इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जांच से संबंधित प्रतिवेदन आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्च कार्यालय भेजे जाने की जानकारी दी गई।
यहीं से अब सवाल खड़ा होता है-शिकायत हुई…नोटिस जारी हुआ…जवाब लिया गया…जांच हुई…प्रतिवेदन उच्च कार्यालय भेजा गया…फिर कार्रवाई कहां अटक गई?
डेढ़ माह बाद भी कार्रवाई का इंतजार
घटना को अब लगभग डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है, विभागीय स्तर पर जांच पूरी होने और प्रतिवेदन उच्च कार्यालय भेजे जाने की बात सामने आने के बावजूद जिम्मेदारों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई सार्वजनिक नहीं हुई है । यदि जांच में नियमों का उल्लंघन नहीं पाया गया, तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि जांच में जिम्मेदारी तय हुई है, तो कार्रवाई का आदेश अब तक सामने क्यों नहीं आया?….फाइल किस स्तर पर लंबित है।
चढ़ोत्तरी में रफा दफा -कितना सच,
मामले को लेकर कुछ सूत्रों और जानकारों की ओर से यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि जांच प्रतिवेदन आने के बाद भी कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास किया गया और कथित आर्थिक लेन-देन के जरिए मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हुई । इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है शिक्षा विभाग में चेले के नाम से प्रख्यात एक व्यक्ति की कथित भूमिका को लेकर भी चर्चाएं जोरों पे है क्योंकि आरोप सही हैं तो कार्रवाई जरूरी है और गलत हैं तो जांच के जरिए आरोपों की सच्चाई भी सामने आनी चाहिए।
निगाहें उच्च कार्यालय की कार्रवाई पर
कुर्री स्कूल का मामला अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, यह सवाल बन चुका है कि सरकारी स्कूल में शिकायत के बाद विभागीय प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और समयबद्ध है, जवाब अब शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को देना है। कुर्री स्कूल की फाइल अब किस टेबल पर है, यह तो विभाग बताएगा… लेकिन डेढ़ माह बाद भी कार्रवाई का इंतजार अपने आप में कई सवाल जरूर खड़े कर रहा है।
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