कांग्रेस में दागियों को दिया जा रहा संगठन में ऊँचा पद
कांकेर:- जिले में इन दिनों ‘नारी सम्मान’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक ताजा घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को नया मोड़ दे दिया है, जहां कांग्रेस की संगठनात्मक नियुक्ति को लेकर उसकी नैतिकता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं ।
दरअसल, कुछ समय पहले एक भाजपा जिला पदाधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी। भाजपा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित की और संबंधित पदाधिकारी ने इस्तीफा भी दे दिया था।
हालांकि, अब यही मुद्दा कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा करता नजर आ रहा है हाल ही में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा संगठन विस्तार के तहत ब्लॉक स्तर पर की गई नियुक्तियों में एक ऐसे कांग्रेसी पार्षद को ब्लॉक महामंत्री बनाया गया है, जिन पर पूर्व में गंभीर आरोप लग चुके हैं। बताया जा रहा है कि जुलाई 2025 में एक महिला द्वारा उनके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत भी ली थी।
इस नियुक्ति को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और सवाल उठाया है कि जो पार्टी दूसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करती है, वह अपने ही नेताओं के मामले में अलग रुख क्यों अपनाती है। विपक्ष इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बता रहा है।
वहीं, इस पूरे मामले पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन विस्तार प्रदेश स्तर की स्वीकृति से किया गया है और संबंधित मामले की जानकारी उन्हें बाद में मिली। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
इधर, संगठन विस्तार के बाद कांग्रेस के अंदर भी असंतोष खुलकर सामने आया है। युवा कांग्रेस में नियुक्तियों को लेकर विवाद बढ़ने पर कुछ पदाधिकारियों ने वरिष्ठ नेताओं तक शिकायत पहुंचाई। आरोप है कि पदों के वितरण में पक्षपात किया गया, जिसके चलते प्रदेश नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा और एक विवादित नियुक्ति रद्द करनी पड़ी।
स्थिति उस समय और दिलचस्प हो गई जब आरोपों से घिरे पार्षद भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल नजर आए, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
कांकेर में उभरा यह घटनाक्रम केवल एक संगठनात्मक विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की नैतिकता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या ‘नारी सम्मान’ का यह सवाल आगामी चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।
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