कांकेर:-बस्तर अंचल के वनांचल क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय की जीवनशैली और खानपान हमेशा से विशिष्ट रहा है। बदलते समय और आधुनिकता के प्रभाव के बावजूद यहां की पारंपरिक खाद्य संस्कृति आज भी जीवित है-खासतौर पर गर्मियों के मौसम में।
जहां शहरी क्षेत्रों में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए कोल्ड ड्रिंक, दही और मट्ठा का सहारा लेते हैं, वहीं ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में मड़िया पेज आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यह केवल एक पेय नहीं, बल्कि परंपरा, पोषण और प्राकृतिक स्वास्थ्य का अनूठा संगम है।
रागी, जिसे स्थानीय भाषा में मड़िया कहा जाता है, यह पेय गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करता है। पोषक तत्वों से भरपूर मड़िया पेज को लू से बचाव के लिए बेहद कारगर माना जाता है स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदाय इस पेय का नियमित सेवन करते हैं इसे रागी के आटे और उबले हुए चावल के पानी से तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि यह बेहद कम लागत में हर घर में आसानी से बन जाता है, जिससे यह आर्थिक रूप से भी सुलभ है।
मड़िया पेज बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक और सरल है रागी को पीसकर उसका आटा तैयार किया जाता है, जिसे रातभर पानी में भिगोया जाता है। सुबह इसे मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर चावल और अन्य स्थानीय सामग्री के साथ पकाया जाता है। हल्का खट्टापन आने के बाद यह स्वादिष्ट पेय तैयार हो जाता है, जिसे नमक, मिर्च, चटनी या अचार के साथ सेवन किया जाता है।
इस पेय की उपयोगिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिहाड़ी मजदूर काम पर जाते समय इसे अपने साथ विशेष बर्तन में लेकर जाते हैं। सूखी लौकी से बने इस पारंपरिक पात्र को स्थानीय बोली में बुर्का कहा जाता है, जो दिनभर इस पेय को ठंडा और ताजा बनाए रखता है।
मड़िया पेज हर आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय है-बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक। यह न केवल शरीर को ठंडा रखता है, बल्कि पोषण भी प्रदान करता है। यही वजह है कि बस्तर क्षेत्र में इसे देसी कोल्ड ड्रिंक के रूप में भी जाना जाता है।
तेज गर्मी के बीच बस्तर का यह पारंपरिक पेय एक बार फिर यह संदेश देता है कि प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली ही असली समाधान है। बिना किसी दुष्प्रभाव के शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाला मड़िया पेज आज भी जनजातीय ज्ञान और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बना हुआ है-और यही वजह है कि यहां कहा जाता है, “ठंडा मतलब मड़िया पेज।”
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