Breaking News
सड़क किनारे तड़पती ज़िंदगी को समाजसेवियों ने नई सांस दी। ना पहचान, ना भाषा… फिर भी बच गई एक जान।#HumanityAlive #InsaniyatZindaHai #ManavtaKiMisal
सड़क किनारे तड़पती ज़िंदगी को समाजसेवियों ने नई सांस दी। ना पहचान, ना भाषा… फिर भी बच गई एक जान।#HumanityAlive #InsaniyatZindaHai #ManavtaKiMisal

इंसानियत ज़िंदा है शीतलहर में तड़प रहे दिव्यांग की समाजसेवियों ने बचाई जान

कांकेर:- स्वार्थ और व्यस्तता से भरी दुनिया में जब मानवीय संवेदनाएं अक्सर कमजोर पड़ती दिखती हैं, ऐसे समय में कांकेर और आसपास के समाजसेवियों ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है। शीतलहर की एक सर्द रात में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तड़प रहे एक दिव्यांग व्यक्ति की जान बचाकर समाजसेवियों ने मानवता की मिसाल पेश की।

घटना नेशनल हाईवे स्थित ग्राम लखनपुरी की है, जहाँ शुक्रवार देर रात एक दिव्यांग व्यक्ति अत्यंत दयनीय अवस्था में सड़क किनारे पड़ा मिला। ठंड और असहाय स्थिति में उसकी जान पर संकट मंडरा रहा था। इसकी सूचना सबसे पहले स्थानीय नागरिक विजय नत्थानी ने प्रसिद्ध समाजसेवी संस्था “जन सहयोग” के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी को दी।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

सूचना मिलते ही अजय पप्पू मोटवानी ने बिना देर किए पुलिस पेट्रोलिंग टीम को अवगत कराया और स्वयं भी मौके पर पहुंच गए। इसी दौरान कांकेर की डिप्टी कलेक्टर के माध्यम से नगरी क्षेत्र के समाजसेवी सनी छाजेड़ और उनकी टीम भी सहायता के लिए रवाना हो गई। मौके पर पहुंचने के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह सामने आई कि पीड़ित व्यक्ति हिंदी नहीं जानता था, मानसिक रूप से भी असंतुलित प्रतीत हो रहा था और किसी से बात करने में डर रहा था। भाषा की बाधा के कारण इलाज और पहचान में काफी समय लग गया।

तेलुगु भाषा जानने वाले ट्रक चालक बने मदद के सेतु

स्थिति उस समय बदली जब आंध्र प्रदेश नंबर की एक गाड़ी को रोकने का प्रयास किया गया। तभी कोरापुट (ओडिशा) निवासी ट्रक चालक नंदू भाटिया ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए वाहन रोका। वे तेलुगु भाषा जानते थे और उन्होंने पीड़ित से संवाद स्थापित किया।

बातचीत में पता चला कि पीड़ित का नाम के. अशोक है, जो करीमनगर, हैदराबाद (तेलंगाना) का निवासी है। वह रोजगार की तलाश में छत्तीसगढ़ आया था, लेकिन एक दुर्घटना में उसका पैर टूट गया। इस हादसे के बाद वह मानसिक रूप से भी असंतुलित हो गया और सहायता से डरने लगा। अपनी मातृभाषा सुनते ही अशोक का डर कम हुआ और वह इलाज के लिए सहमत हो गया।

अपना घर आश्रम में मिला सुरक्षित ठिकाना

सभी के समन्वित प्रयासों से सुबह होने तक पीड़ित को “अपना घर आश्रम”, मंदिर हसौद (बोरी गांव), रायपुर पहुँचाया गया, जहाँ उसके इलाज, भोजन और रहने की समुचित व्यवस्था की गई। आश्रम के अध्यक्ष कोपल जी सुल्तानिया ने तुरंत उसे सेवा हेतु स्वीकार करने की सहमति दी।

इस पूरे मानवीय प्रयास में पुलिस पेट्रोलिंग टीम के अंकालू ध्रुव, जितेंद्र उइके, सनत विश्वकर्मा (चालक), समाजसेवी सनी छाजेड़, सत्यम भट्ट, तीरथ राज, खेमराज साहू, शिवा प्रधान, तथा जन सहयोग संस्था के करण नेताम, अमृत जवरानी, सुनील आहूजा सहित कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समाजसेवियों, पुलिस और एक संवेदनशील ट्रक चालक के इस संयुक्त प्रयास की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते यह मदद न मिलती, तो शीतलहर में उस असहाय व्यक्ति की जान बचना बेहद मुश्किल था। यह घटना न केवल मानवीय संवेदना का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता से किसी की ज़िंदगी बचाई जा सकती है।

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

About Prakash Thakur

प्रकाश ठाकुर, पेज 16 न्यूज़ के मुख्य संपादक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

Check Also

"15 साल और जनता के पैसे पर खेल… अब प्यार भी विवाद बन गया! #KankerDrama #CorruptionAlert #LoveAndLoot #VillagePolitics #PublicAnger

पंचायत सचिव का कुर्सी पर 07 साल बेमिसाल, भ्रष्टाचार और निजी संबंधों का नेटवर्क उजागर

 सचिव पर लग रहे आरोपों से खुल रही पोल Follow Us कांकेर:– जिले की ग्राम …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *