कांकेर:-छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास आधारित पूना मारगेम नीति और सुरक्षा बलों के सतत समन्वित प्रयासों का बड़ा परिणाम बुधवार को सामने आया, जब 23 लाख के कुल इनामी 04 माओवादी कैडरों ने हिंसक रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में उत्तर बस्तर डिवीजन, डी.के. टेक्निकल टीम और गढ़चिरौली डिवीजन से जुड़े महिला एवं पुरुष कैडर शामिल हैं। इनमें 02 महिला और 02 पुरुष माओवादी शामिल हैं, जिनमें कई गंभीर नक्सल घटनाओं के आरोपित कैडर भी हैं। सभी ने भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करते हुए शांति व विकास के मार्ग को अपनाने की घोषणा की।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी काजल उर्फ रीता बेड़या कंपनी नंबर–10 सदस्या (गढ़चिरौली डिवीजन) ईनाम 8 लाख संगठन में भर्ती वर्ष 2021 मुख्य घटना नवम्बर 2024, ग्राम मुसफरसी में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 05 नक्सली मारे गए -उक्त घटना में शामिल। मंजुला उर्फ लक्ष्मी पोटाई एसीएम, उत्तर बस्तर डिवीजन टेक्निकल टीम सदस्या ईनाम 5 लाख संगठन में भर्ती: वर्ष 2005 सक्रियता 2006-2025 के बीच 16 से अधिक बड़ी नक्सल घटनाओं में शामिल 2008, महामाया–बल्ली के मध्य IED विस्फोट -03 जवान शहीद 2009, ग्राम कोरकोटी में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ एवं एम्बुश -29 जवान शहीद (जिसमें उस समय के पुलिस अधीक्षक भी शामिल) विलास उर्फ बौतु उसेण्डी पीपीसीएम, डी.के. टेक्निकल प्लाटून नंबर–50 ईनाम 5 लाख संगठन में भर्ती वर्ष 1995 मुख्य घटनाएँ 2007, साधुमिचगांव मोड़ एम्बुश -05 जवान शहीद मार्च 2025, पोदेबेड़ा–बीनागुंडा मुठभेड़ में सक्रिय भूमिका रामसाय उर्फ लखन मर्रापी बड़गांव एलओएस उप कमांडर (एसीएम) ईनाम 5 लाख संगठन में भर्ती वर्ष 2004 42 से अधिक नक्सल घटनाओं में शामिल, जिनमें 2008, गुमडीडीह–कोंडे एम्बुश -06 जवान शहीद 2010, भुस्की मोड़ एम्बुश -05 जवान शहीद 2019, महला एम्बुश -04 जवान शहीद 2024, हिदुर मुठभेड़ -01 नक्सली ढेर, 01 जवान शहीद
आत्मसमर्पण प्रक्रिया और नेतृत्व
मुख्यधारा में लौटने की यह प्रक्रिया डीआरजी, बीएसएफ, स्थानीय पुलिस, नक्सल ऑप्स टीम और जिला प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में 04 माओवादी कैडरों ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। प्रत्येक कैडर को राज्य सरकार की नीति के अनुसार 50,000 की तत्कालिक सहायता राशि भी प्रदान की गई है। पुनर्वास और पुनर्समावेशन से जुड़ी शेष प्रक्रियाएँ जारी हैं।
एसएसपी आई.के. एलिसेला ने कहा-
“माओवादी परिवार भी चाहते हैं कि उनके बेटे-बेटियाँ सामान्य जीवन जीएँ। ‘पूना मारगेम’ नीति उनके भविष्य को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाती है। जो भी रास्ता बदलना चाहता है, सरकार हर प्रकार से साथ खड़ी है।”
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