बीजापुर:- देश के सबसे कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा की मौत को लेकर नया विवाद सामने आया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (न्यू डेमोक्रेसी) ने प्रेस नोट जारी कर दावा किया है कि हिड़मा की मौत किसी एनकाउंटर में नहीं, बल्कि गिरफ्तारी के बाद यातनाएं देकर हत्या की गई।
न्यू डेमोक्रेसी के सचिव सूर्यम ने कहा कि:
“हिड़मा और उसके साथियों को गोलियों से नहीं मारा गया। उन्हें पकड़ा गया, पूछताछ की गई, यातनाएं दी गईं और बाद में उनकी हत्या कर शव जंगल में फेंक दिया गया। यह एनकाउंटर नहीं, एक योजनाबद्ध हत्या है।” उन्होंने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच / स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा जांच करवाने की मांग की है।
प्रेस नोट में क्या कहा गया…?
प्रेस नोट के अनुसार:- हिड़मा को पूर्वी गोदावरी के जंगलों से गिरफ्तार किया गया, पूछताछ के दौरान प्रताड़ित किया गया, पूछताछ पूरी होने के बाद उसकी हत्या कर शव जंगल में फेंक दिया गया, घटना को “एनकाउंटर” बताकर फर्जी मुठभेड़ का रूप दिया गया। साथ ही, CPI-ML के नेता का दावा है कि नक्सलियों की केंद्रीय समिति के महासचिव टिप्पानी तिरुपति उर्फ देवजी सहित कई बड़े नक्सली नेता गुप्त रूप से गिरफ्तार किए गए हैं और हिरासत में यातनाएं झेल रहे हैं।
अब तक सुरक्षा एजेंसियों ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला मानवाधिकार एवं न्याय प्रणाली से जुड़ा एक संवेदनशील राष्ट्रीय विषय बन सकता है।
बीजापुर और उसके आसपास के इलाकों में यह चर्चा है कि सुरक्षा बलों ने लंबे समय से हिड़मा की लोकेशन ट्रैक कर रखी थी। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि एनकाउंटर की कहानी अचानक सामने आई, लेकिन मुठभेड़ की लोकेशन व टाइमिंग को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।
हिड़मा की मौत के साथ नक्सल मोर्चे का सबसे बड़ा अध्याय खत्म हो गया है, लेकिन अब असली सवाल मौत पर नहीं, बल्कि ‘मौत कैसे हुई?’ पर उठ रहे हैं।
यदि न्यू डेमोक्रेसी के आरोपों की जांच होती है, तो यह मामला सिर्फ सुरक्षा ऑपरेशन नहीं, बल्कि कानूनी और नैतिक बहस का विषय बन सकता है।
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