कांकेर/भानुप्रतापपुर:- अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भानुप्रतापपुर पुलिस ने आज दोपहर 12 बजे एक चार पहिया वाहन को दबोचा, जिसमें अंग्रेजी शराब भरी हुई थी। जांच के दौरान पता चला कि वाहन को खुद शराब दुकान का चौकीदार चला रहा था, पुलिस ने मौके से आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर वाहन जब्त कर लिया है।
मैनेजर की गाड़ी, कर्मचारी ड्राइवर
सूत्रों के अनुसार, जब्त हुआ वाहन संबंधित अंग्रेजी शराब दुकान के मैनेजर का बताया जा रहा है। लंबे समय से संदेह जताया जा रहा था कि शराब दुकान के कर्मचारी और मैनेजर की मिलीभगत से ही अवैध सप्लाई का जाल फैला हुआ है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और आखिरकार बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि राजस्व को हो रहे नुकसान और अवैध कारोबार के बढ़ते जाल को रोकने के लिए कई बार मांग उठी थी, लेकिन अब तक आबकारी विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
पुलिस ने मामले में आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल अब निगाहें आबकारी विभाग की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं- जब संबंधित पुलिस अधिकारी से विवरण मांगा गया तो उन्होंने बताया कि वे अभी अन्य कार्यों में व्यस्त हैं, लेकिन मामले की जानकारी उन्हें है और कार्रवाई जारी है।
वहीं, आबकारी विभाग की प्रभारी अधिकारी रेणुका मरकाम ने मासूमियत से चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि-
“चौकीदार कल छुट्टी लेकर अस्पताल गया था क्योंकि उसकी पत्नी को कांकेर में सीजर से बेटी हुई है। और वह बेटी पैदा होने की खुशी में मैनेजर की गाड़ी मांगकर लिमिट मात्रा में शराब ले जा रहा था।”
आबकारी विभाग के इस बयान के बाद नई बहस छिड़ गई है -क्या जिस व्यक्ति की पत्नी अस्पताल में भर्ती थी, वह उसे छोड़कर खुशी में 50 किमी दूर शराब लेने आया था? क्या यह ‘खुशी में शराब लेने’ की कहानी सच है या किसी को बचाने की कोशिश?
आगे क्या…?
इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं-
✔ क्या मैनेजर की भूमिका की गहन जांच होगी?
✔ क्या आबकारी विभाग इस अवैध सप्लाई चेन पर शिकंजा कस सकेगा?
✔ या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा?
अब देखना यह होगा कि पुलिस और आबकारी विभाग कितनी सख़्ती से कार्रवाई करते हैं।
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