
बालोद:- जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में है। बीते तीन दिनों के भीतर जिले में तीन हिरणों की अलग-अलग परिस्थितियों में मौत हो गई है, जिससे न सिर्फ वन्यजीव प्रेमियों में चिंता की लहर है, बल्कि विभाग की गंभीर लापरवाही भी उजागर हो रही है।
जानकारी के अनुसार, एक हिरण की मौत गांव के समीप आवारा कुत्तों के हमले में हो गई, जबकि दूसरा हिरण पानी की तलाश में भटकते हुए जलाशय में डूब गया। तीसरे हिरण की मौत संदिग्ध परिस्थिति में हुई, जिसकी जांच की जा रही है। तीनों घटनाओं के बाद वन विभाग ने केवल औपचारिकता निभाते हुए पोस्टमार्टम कराया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि विभाग की निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। वन्य क्षेत्र से सटे गांवों में ना तो कोई गश्त है और ना ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी योजना। हिरण जैसे संवेदनशील वन्यजीव यदि कुत्तों के शिकार बन रहे हैं या जल स्त्रोतों की कमी के कारण जान गंवा रहे हैं, तो यह विभाग की भारी चूक को दर्शाता है।
वन विभाग की ओर से अब तक इन घटनाओं को लेकर कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। जानवरों की मौत के बाद केवल औपचारिक जांच और अंतिम संस्कार कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या विभाग की जिम्मेदारी केवल शव के पोस्टमार्टम और दफन तक ही सीमित रह गई है?
वन्य जीवों की लगातार हो रही मौतें न केवल पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरा हैं, बल्कि यह विभागीय लापरवाही का भी आईना हैं। यदि अब भी जिम्मेदार अफसर हरकत में नहीं आए, तो आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण केवल फाइलों और रिपोर्टों में ही रह जाएगा।
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