कॉर्पोरेट हस्तक्षेप और विस्थापन के खिलाफ जनजागरण का आह्वान
दुर्गुकोदल:- बस्तर संभाग सहित पूरे छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते कॉर्पोरेट हस्तक्षेप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता गहराती जा रही है। इसी कड़ी में शिवसेना ने राज्य सरकार पर बड़े पूंजीपतियों को संरक्षण देने और क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन व पर्यावरण के शोषण का रास्ता खोलने का आरोप लगाया है।
शिवसेना नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर देश के बड़े औद्योगिक समूहों की नजर है। इन क्षेत्रों में खनन, उद्योग और अन्य परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय जनता को विस्थापित कर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि सरकार विकास के नाम पर जनता को झूठे सपने दिखाकर ऐसे प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे रही है, जिनका सीधा लाभ कॉर्पोरेट घरानों को और नुकसान स्थानीय समुदायों को हो रहा है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर शिवसेना द्वारा शीघ्र ही “उलगुलान यात्रा” निकालने की घोषणा की गई है। इस यात्रा के माध्यम से क्षेत्र की जनता को जागरूक कर जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की रणनीति बनाई जा रही है।
शिवसेना ने क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, किसानों, युवाओं, बेरोजगारों और सामाजिक रूप से जागरूक नागरिकों से इस यात्रा में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि आज जनता जागरूक नहीं हुई, तो आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्र उजड़ सकते हैं, जिसका जवाब आने वाली पीढ़ियों को देना मुश्किल होगा।
नेताओं ने यह भी कहा कि जल, जंगल और जमीन सिर्फ वर्तमान की नहीं, बल्कि भविष्य की धरोहर है। इन्हें बचाने के लिए समय रहते संगठित संघर्ष आवश्यक है। शिवसेना ने स्पष्ट किया कि ‘उलगुलान यात्रा’ शांतिपूर्ण जनजागरण का माध्यम होगी, जिसके जरिए सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता की आवाज को बुलंद किया जाएगा।
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