
कांकेर:-बस्तर संभाग में चलाए जा रहे परपूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। कांकेर जिले में कुल 11 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया, जिसे क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में उत्तर बस्तर डिवीजन के 6 और आरकेबी डिवीजन के 5 सदस्य शामिल हैं। इनमें 2 PPCM, 7 ACM और 2 PM रैंक के कैडर बताए जा रहे हैं। इन सभी पर कुल मिलाकर करीब 60 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने अपने पास मौजूद हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंप दिए। जब्त हथियारों में 1 AK-47, 3 SLR और 3 .303 राइफल सहित कुल 9 घातक हथियार शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह सरेंडर न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्र में विश्वास बहाली को भी गति देगा।
इसके साथ ही सुरक्षा बलों ने अभियान के दौरान नक्सलियों के कई छिपे हुए हथियार डंप भी बरामद किए हैं। बरामदगी में 1 AK-47, 1 इंसास राइफल, 1 SLR, 9 BGL लॉन्चर, 7 देशी कट्टे, बड़ी मात्रा में BGL सेल, ऑटोमैटिक हथियारों के राउंड, ग्रेनेड, डेटोनेटर, मैगजीन और करीब 5 लाख रुपये नकद शामिल हैं। यह बरामदगी माओवादियों की तैयारी और संसाधनों की गंभीरता को दर्शाती है।
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने बताया कि यह सफलता लगातार चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रम, संवाद और विश्वास बहाली के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन पहलों के कारण अब कई माओवादी मुख्यधारा में लौटने के लिए आगे आ रहे हैं।
जिला पुलिस ने एक बार फिर अपील की है कि जो माओवादी अब भी सक्रिय हैं, वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षित, सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
बस्तर में बदलते हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सुरक्षा रणनीति के साथ-साथ पुनर्वास और विश्वास निर्माण की नीति असर दिखा रही है। यह आत्मसमर्पण अभियान क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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