सचिव पर लग रहे आरोपों से खुल रही पोल
कांकेर:– जिले की ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लंबे समय से उठते रहे भ्रष्टाचार के आरोप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला केवल विकास कार्यों में अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित तौर पर भ्रष्टाचार से अर्जित धन के निजी उपयोग और संरक्षण तक जा पहुंचा है, जिससे विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कांकेर जनपद पंचायत क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में पदस्थ एक सचिव पिछले 07 वर्षों से अधिक समय से उसी पंचायत में पदस्थ है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस लंबे कार्यकाल के दौरान पंचायत स्तर की कई सरकारी योजनाओं में भारी अनियमितताएं हुईं । इन आरोपों को लेकर ग्रामीणों द्वारा अब तक तीन बार शिकायतें संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
तबादलों की सूची बदली, लेकिन एक कुर्सी अडिग
जानकारों का कहना है कि हाल के वर्षों में जनपद की 64 ग्राम पंचायतों में सचिवों के कार्यक्षेत्र बदले गए, लेकिन विवादों में घिरे इस पंचायत सचिव का तबादला नहीं हो सका। इसे राजनीतिक संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली संपर्कों के कारण न केवल शिकायतें ठंडे बस्ते में डाली गईं, बल्कि संबंधित अधिकारी भी निर्णायक कदम उठाने से बचते रहे।
निजी आचरण बना चर्चा का विषय
इस बीच उक्त पंचायत सचिव से जुड़ा एक और विवाद सामने आया है, जिसने पूरे जनपद में चर्चा को और तेज कर दिया है। ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, पंचायत सचिव के निजी आचरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कथित रूप से भ्रष्टाचार से अर्जित धन का उपयोग निजी लाभ और संबंधों में किया गया। पंचायत सचिव के निजी संबधों पर जानकार बताते है कि लम्बे समय से सचिव के पंचायत में रहने से एक स्थानीय ग्रामीण महिला से भलोबासा होइया गेछे यानि प्यार हो गया है और उपहार में उसे एक तालाब दिए जाने चर्चा जोरो पे है लेकिन पंचायत सचिव की लव स्टोरी में परमाणु बम तब गिरा जब पंचायत सचिव की निजी संबंधों की भनक परिजनों को लगी और माँ और पत्नी ने इश्क के दरिया में ही दोनों को जमकर कूट दिया फिर इश्कबाजी और कुटाई की खबर सचिव बिरादरी सहित पुरे जनपद में फ़ैल गई फिलहाल यह मामला चर्चाओं के दायरे में है । अब निगाहें जिला पंचायत और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि क्या वे इस तरह के प्रकरण में स्वतः संज्ञान ले विवादों में विराम लगा पायेगी, जिसका समाधान प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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