ग्रामीणों के प्रदर्शन और मीडिया रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन ने दी जांच के आदेश

कांकेर:-उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल विकासखंड में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत हुए निर्माण और मरम्मत कार्यों में लगभग 7 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों के प्रदर्शन और मीडिया में खबर उजागर होने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन हरकत में आया है और गुणवत्ता जांच समिति गठित कर जांच के आदेश जारी किए हैं।
कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अंतर्गत जिले की सभी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रुपये की राशि सभी विकासखंडों को आबंटित की गई थी। दुर्गुकोंदल विकासखंड में इस योजना के नाम पर भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुना गया कि शासन की मंशा पर ही प्रश्नचिह्न लग गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन अधिकारी ने लगभग 7 करोड़ रुपये की आबंटित राशि में से कुछ कार्य स्थानीय प्रतिनिधियों को तो दिए, लेकिन अधिकांश कार्य अपने परिजनों और परिचितों के नाम पर ठेके लेकर राशि आहरित कर ली। अनियमितता की जानकारी मिलते ही ग्रामवासी मुकेश गावड़े, प्रदीप कोमरा सहित कई ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जांच की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश स्कूलों में न तो कार्य हुआ और न ही गुणवत्ता का ध्यान रखा गया -फिर भी भुगतान पूरा कर दिया गया। इसी बीच, Page16_News ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से प्रकाशित कर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आया।
गुणवत्ता जांच समिति गठित-जांच में शामिल अधिकारी
कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के आदेश क्रमांक 5534 (दिनांक 16.10.2024) और ग्रामीणों के पत्र (दिनांक 19.08.2025) के संदर्भ में जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच समिति गठित की है। इस समिति में-मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्गुकोंदल -अध्यक्ष कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग (भवन/संरचना), भानुप्रतापपुर सदस्य उप अभियंता, लोक निर्माण विभाग (भवन/संरचना), भानुप्रतापपुर सदस्य इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पूर्ण एवं प्रगतिरत कार्यों की गुणवत्ता जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन शीघ्र प्रस्तुत करें, ताकि वस्तुस्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा सके।
भुगतान हो चुका, पर कार्य अधूरे
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, कई स्कूलों में निर्माण कार्य अधूरे हैं या मानक अनुरूप नहीं हैं। कुछ स्थानों पर सामग्रियों की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की पाई गई है, जबकि भुगतान लगभग पूरी राशि का किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में कई स्कूलों के निर्माण कार्य “कागजों पर पूर्ण” बताए गए हैं, जबकि ज़मीनी सच्चाई इसके विपरीत है।
प्रशासन सख्त, लेकिन जांच पर उठ रहे सवाल
मामले के उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने कहा है कि किसी भी अधिकारी या ठेकेदार को बख्शा नहीं जाएगा, यदि मानक उल्लंघन या फर्जी भुगतान का प्रमाण मिलता है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, जांच टीम के गठन के बाद मामले से जुड़े कुछ अधिकारी और ठेकेदार बैचैन हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि “ठेकेदार-अधिकारी” अपने खिलाफ जांच को प्रभावित करने की कोशिश में हैं और सारा दोष बाबू (सहायक ग्रेड-02) पर मढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।
स्थानीय हलकों में यह चर्चा है कि इस मामले में “बलि का बकरा” बनाकर छोटे कर्मचारी पर कार्रवाई की जा सकती है, ताकि बड़े स्तर पर हुए भ्रष्टाचार की जांच आगे न बढ़ सके। फिलहाल, विभागीय अधिकारी संबंधित दस्तावेजों के साथ जिला मुख्यालय पहुंच चुके हैं। जांच टीम द्वारा रिकॉर्ड के सत्यापन और गुणवत्ता परीक्षण के बाद अगली कार्यवाही तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट प्राप्त होते ही दोषियों पर शासन स्तर की कार्रवाई की जाएगी।
Live Cricket Info
Page16 News Khabar Wahi Jo Sach Ho!

