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कागज़ों में “निविदा प्रक्रियाधीन”… मौके पर 30% काम पूरा? 🤔 ₹547.68 लाख का पलाचुर जलाशय-क्या है असलियत ? #RTIRevelation #Kanker #PublicFunds #Transparency
कागज़ों में “निविदा प्रक्रियाधीन”… मौके पर 30% काम पूरा? 🤔 ₹547.68 लाख का पलाचुर जलाशय-क्या है असलियत ? #RTIRevelation #Kanker #PublicFunds #Transparency

कागजों में निविदा प्रक्रियाधीन, जमीन पर 30% काम पूरा; पलाचुर जलाशय जीर्णोद्धार पर उठे गंभीर सवाल

भानुप्रतापपुर/कांकेर:-जल संसाधन विभाग के कांकेर संभाग में पारदर्शिता और प्रक्रिया पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला पलाचुर जलाशय के जीर्णोद्धार कार्य से जुड़ा है, जिसके लिए 547.68 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

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चौंकाने वाली बात यह है कि जनसूचना अधिकारी एवं कार्यपालन अभियंता, कांकेर द्वारा 10 फरवरी 2026 को सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी में इस कार्य को अभी भी निविदा प्रक्रियाधीन बताया गया है। जबकि मौके की स्थिति इस दावे से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।

स्थानीय सूत्रों और स्थल निरीक्षण के अनुसार, 23 दिसंबर 2025 को इस परियोजना का औपचारिक भूमिपूजन सांसद भोजराज नाग एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जा चुका है। इतना ही नहीं, जलाशय स्थल पर लगभग 30 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने की पुष्टि भी की जा रही है।

निर्माण कार्य के दौरान 50 से अधिक फलदार एवं सागौन के पेड़ों की कटाई की भी जानकारी सामने आई है। यह कटाई किस अनुमति और किस प्रक्रिया के तहत की गई, इस पर विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

बड़ा सवाल: बिना टेंडर के काम कैसे शुरू…?

सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार निविदा प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई, तो कार्य किस आधार पर प्रारंभ किया गया?क्या किसी एजेंसी या ठेकेदार को निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम सौंप दिया गया?, क्या शासन स्तर पर तथ्यों को छिपाकर भ्रामक जानकारी दी जा रही है?, क्या यह सरकारी वित्तीय नियमों का उल्लंघन है?

आरटीआई में दी गई जानकारी और जमीनी हकीकत के बीच का यह स्पष्ट विरोधाभास पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है। स्थानीय स्तर पर करोड़ों रुपये के संभावित वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। यदि निविदा प्रक्रिया पूरी किए बिना कार्य प्रारंभ हुआ है, तो यह न केवल वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है बल्कि पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत भी है।

मामले में स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विभागीय दावों और वास्तविक कार्य प्रगति के बीच यह अंतर क्यों है।

जहाँ एक ओर शासन पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करता है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की घटनाएँ प्रशासनिक विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या कोई जांच समिति गठित की जाती है।

 

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About Prakash Thakur

प्रकाश ठाकुर, पेज 16 न्यूज़ के मुख्य संपादक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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