रोजगार और पारदर्शिता की उठी मांग
कांकेर/भानुप्रतापपुर:- गोदावरी माइंस द्वारा प्रस्तावित जनसुनवाई के स्थान को लेकर आज भानुप्रतापपुर में ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। खनन प्रभावित गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने भानुप्रतापपुर-कच्चे मार्ग पर चक्का जाम करते हुए मांग की कि जनसुनवाई का आयोजन भानुप्रतापपुर में ही किया जाए, ताकि प्रभावित जनता अपनी बात खुलकर रख सके। प्रदर्शन के चलते पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आदिवासी नेता कोमल हुपेंडी ने गोदावरी माइंस प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी लगातार क्षेत्र के आदिवासी समुदाय का शोषण कर रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जनसुनवाई का स्थान बदला जाए और कंपनी की मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें-रोजगार और स्थानीय विकास
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गोदावरी माइंस द्वारा खनन से प्रभावित इलाकों में CSR और DMF (जिला खनिज न्यास निधि) की राशि का उपयोग विकास कार्यों में नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी के वादों के बावजूद न तो रोजगार सृजन हुआ है, न ही बुनियादी सुविधाओं में कोई सुधार देखने को मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देते हुए रोजगार दिया जाए और खनन से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए CSR एवं DMF निधियों का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था
चक्का जाम के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने पुलिस बल की तगड़ी तैनाती की। अधिकारी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रशासन जनसुनवाई के आयोजन स्थल को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियों पर विचार कर सकता है।
ग्रामों में बढ़ता असंतोष
खनन प्रभावित क्षेत्रों में गोदावरी माइंस के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इस चक्का जाम से यह साफ संकेत मिला है कि क्षेत्र में औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर स्थानीय समुदायों की सहमति और भागीदारी के बिना विकास की दिशा में आगे बढ़ना अब आसान नहीं होगा।
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