वरिष्ठ अधिकारी रातों-रात पहुंचे कांकेर जेल

कांकेर:- सर्व आदिवासी समाज के नेता एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर की जेल में बंद रहने के दौरान इलाज के समय हुई संदिग्ध मौत ने जिले में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के बाद परिजनों और समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है, जिसकी खबर मीडिया में आने पर जेल विभाग की मुश्किलें तेजी से बढ़ गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, बढ़ते दबाव को देखते हुए केन्द्रीय जेल जगदलपुर के दो वरिष्ठ अधिकारी गुरुवार देर रात करीब 10 बजे जिला जेल कांकेर पहुंचे। अधिकारियों ने जेल अधीक्षक से पूरी घटना की जानकारी लेने का प्रयास किया और घटनाक्रम को समझने के लिए कई दस्तावेजों व रजिस्टरों की जांच भी की। हालांकि उनके पहुंचते ही यह बात भी जेल परिसर के बाहर तेजी से फैल गई कि विभाग इस प्रकरण में डैमेज कंट्रोल मोड में है।
जेल विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विवाद को शांत करने और बढ़ते जनाक्रोश को नियंत्रित करने के लिए यह प्रस्ताव भी चर्चा में है कि कांकेर जिला जेल अधीक्षक को जगदलपुर में संलग्न किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि वर्तमान अधीक्षक जल्द ही सेवानिवृत्ति की कगार पर हैं, ऐसे में विभाग इस कदम को तनाव कम करने और अपनी छवि बचाने के रूप में देख रहा है।
परिजनों और समाज का रोष, निष्पक्ष जांच की मांग
जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत के बाद सर्व आदिवासी समाज ने गुरुवार शाम को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने पत्र जारी कर कहा कि वे चारामा या जिला मुख्यालय में प्रशासन से मुलाकात कर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग दोहराएंगे। परिजनों का आरोप है कि जीवन ठाकुर की बीमारी, इलाज और जेल में उनकी स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी समय पर साझा नहीं की गई। समाज ने स्पष्ट किया है कि जब तक मृतक के इलाज, सुरक्षा और जेल में व्यवहार से जुड़ी बातों की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा और उनके शव का समाज अंतिम संस्कार भी नहीं करने का फैसला लिया है ।
जेल अधिकारी का विवादों से है पुराना नाता
कांकेर जेल अधीक्षक विवादों में पहली बार नहीं आ हैं। इससे पूर्व महिला जेलकर्मियों ने अधीक्षक और उनके पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी थीं। हालांकि उन शिकायतों पर आज तक विभाग ने क्या कार्रवाई की, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। जानकारी यह भी बताती है कि अधीक्षक और उनके पति से जुड़ा विवाद कांकेर तक सीमित नहीं रहा है। दुर्ग जेल में पदस्थापना के दौरान भी जेलकर्मियों से उनके पति की हाथापाई खबरे भी जमकर विभाग में चर्चा का विषय रहा तब वहा से हटाते हुए मामले को शांत कर डेमेज कंट्रोल किया गया था।
विभागीय कार्यवाही पर निगाहें
जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत ने न केवल जेल विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि जेल प्रबंधन से जुड़े विवाद वर्षों से समाधान की प्रतीक्षा में हैं। अब सवाल यह है कि क्या विभाग इस बार किसी ठोस कार्रवाई तक जाता है या फिर अटैचमेंट और स्थानांतरण के जरिए मामले को शांत करने का प्रयास ही किया जाएगा।
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