इतने दिनों बाद भी शुरू नहीं हो सका जाँच कि प्रक्रिया सवालों में शिक्षा विभाग
कांकेर। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत दुर्गुकोंदल विकासखंड में हुए निर्माण व मरम्मत कार्यों में लगभग 7 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। ग्रामीणों के प्रदर्शन और मीडिया में खबरों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच अवश्य शुरू की है, लेकिन जांच टीम की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों के पत्र (दिनांक 19.08.2025) और जिला कलेक्टर के आदेश क्रमांक 5534 (दिनांक 16.10.2024) के संदर्भ में जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश क्रमांक 8850 दिनांक 28/08/2025 के माध्यम से एक गुणवत्ता जांच समिति गठित की है। इसमें शामिल हैं-मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्गुकोंदल –अध्यक्ष, कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग (भवन/संरचना), भानुप्रतापपुर – सदस्य, उप अभियंता, लोक निर्माण विभाग (भवन/संरचना), भानुप्रतापपुर-सदस्य इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सभी पूर्ण एवं प्रगतिरत कार्यों की गुणवत्ता जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि उच्चाधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके।
जांच दल में लेखा परीक्षक का नाम तक नहीं–प्रश्नचिह्न
स्थानीय ग्रामीणों और जानकारों का कहना है कि यदि 7 करोड़ रुपये की सरकारी राशि खर्च की गई है, तो वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए लेखा परीक्षक / ऑडिट टीम का होना अनिवार्य है। लेकिन जांच समिति में न तो किसी वित्तीय विशेषज्ञ का नाम शामिल है और न ही किसी स्वतंत्र एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह जांच सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह सकती है। Page16 News द्वारा जांच की प्रगति जानने के प्रयास में जनपद पंचायत दुर्गुकोंदल के CEO ने बताया कि उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी को दस्तावेज उपलब्ध कराने का पत्र भेजा है, और दस्तावेज मिलने के बाद ही आगे कार्यवाही शुरू होगी। वहीं, जांच दल के सदस्य अभियंता महेंद्र कश्यप से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
“फाइलें आएंगी, जांच होगी… फिर मामला ठंडा पड़ जाएगा”-आदिवासी नेता कोमल हुपेंडी

मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने वाले युवा आदिवासी नेता कोमल हुपेंडी ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है:
“यह जांच दल गठन एक मजाक है। करोड़ों रुपए की अनियमितता की जांच में लेखा परीक्षक नहीं है। फील्ड विजिट नहीं शुरू हुआ। दस्तावेज तक नहीं मिले। इससे साफ है कि समय बीतेगा और मामला ठंडा पड़ जाएगा। दुर्गुकोंदल और भानुप्रतापपुर में करोडो के भ्रष्टाचार के मामले है ऐसे में दोषियों को क्लीन चिट और शायद प्रमोशन भी मिल सकता है।”
ग्रामीणों में आक्रोश-पारदर्शी जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गुकोंदल व भानुप्रतापपुर में स्कूलों के नाम पर बड़े पैमाने पर काम दिखाकर राशियों की बंदरबांट की गई, लेकिन अधिकांश इमारतों की गुणवत्ता बेहद खराब है। ग्रामीणों की मांग है कि-स्वतंत्र ऑडिट टीम गठित की जाए, निर्माण स्थलों का मैदानी निरीक्षण हो, दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए, राशियों की वसूली हो
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