कांकेर। चारामा के जैसाकर्रा में बनाए गए इंदरु केवट नेचर पार्क के लोकार्पण कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद और विधायक के नाम को शिलालेख से हटाए जाने के बाद जिला राजनीति में घमासान मच गया है। वन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्रीय जनता, भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। करीब 50 लाख रुपए की लागत से बने नेचर पार्क के शिलालेख में केवल वन मंत्री केदार कश्यप का नाम अंकित किया गया, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि-सांसद भोजराज नाग, विधायिका सावित्री मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष,जनपद पंचायत अध्यक्ष,सभी के नाम गायब थे। जबकि लोकार्पण कार्यक्रम के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में इन सभी जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल थे। इससे सवाल खड़े हो गए हैं कि निमंत्रण पत्र में नाम रहते हुए शिलालेख से नाम क्यों हटाए गए?
गुटबाजी और विभागीय नाराज़गी बताया जा रहा कारण
सूत्रों के अनुसार, शिलालेख से नाम हटाने के पीछे स्थानीय राजनीतिक गुटबाजी और कुछ अधिकारियों की सांसद व विधायक के प्रति नाराज़गी को कारण बताया जा रहा है। भाजपा दफ्तरों से लेकर क्षेत्रीय कांग्रेस नेताओं तक, सभी ने इस निर्णय पर असंतोष जताया है। अधिकारियों द्वारा सांसद भोजराज नाग की उपेक्षा का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले-जिला निर्माण समिति के सेल्फ–सपोर्टेड शेड भूमि पूजन,पैरी नदी निर्माण कार्य का शुभारंभ, इन कार्यक्रमों में भी सांसद की अनुपस्थिति या नाम न होने को लेकर विवाद बना था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि यह रवैया इसी तरह जारी रहा तो सांसद का गुस्सा कभी भी फूट सकता है, और प्रशासनिक–राजनीतिक टकराव और तेज़ हो सकता है।
जनता और नेताओं में तीखी प्रतिक्रिया
वन विभाग के इस कदम को लेकर जैसाकर्रा और आसपास के ग्रामीणों ने भी विरोध दर्ज कराया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने पार्क में क्षेत्रीय प्रतिनिधियों की उपेक्षा कर राजनीतिक सौदेबाजी की बू आती है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों के नेता मांग कर रहे हैं कि-शिलालेख में सभी जनप्रतिनिधियों के नाम जोड़ें, इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हो, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाया जाए।
अब निगाहें प्रशासन के कदम पर
विवाद बढ़ने के बाद अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि-क्या वन विभाग अपनी गलती सुधारते हुए नया शिलालेख जारी करेगा?
या फिर यह विवाद भी पहले की घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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