कांकेर:- राज्य सरकार जहाँ एक ओर बस्तर अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के दावे कर रही है,
वहीं दूसरी ओर नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा ब्लॉक से आई एक तस्वीर ने इन दावों की सच्चाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में कोयलीबेड़ा स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक आरएचओं शराब के नशे में धुत होकर सड़क किनारे बेहोश पड़े दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है।
शराब के नशे में धुत स्वास्थ्यकर्मी स्थानीय लोगों ने खींची तस्वीर
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह घटना मंगलवार की बताई जा रही है। संबंधित स्वास्थ्यकर्मी को मुख्य चौक के पास एक दुकान के सामने नशे की हालत में गिरा देखा गया। ग्रामीणों ने पहले उसे जगाने की कोशिश की, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली,
तो उन्होंने तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर डाल दी। कुछ ही घंटों में यह तस्वीर वायरल हो गई और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।
अधिकारियों ने ली जानकारी-कार्रवाई के संकेत
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड चिकित्सा अधिकार ने कहा-
“शाम के समय घटना की जानकारी मिली है।
मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच के बाद आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।”
हालाँकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है या नहीं।
पहले भी उजागर चुकी है शराबखोरी की घटना
कोयलीबेड़ा ब्लॉक से जुड़ा पहला ऐसा मामला नहीं है, कुछ समय पहले भी इसी क्षेत्र में एक चिकित्सक के नशे में ड्यूटी पर पहुँचने की घटना उजागर हुई थी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था कांकेर जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों- जैसे कोयलीबेड़ा, आमाबेड़ा, आज भी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। कई उप स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ भवन बनकर रह गए हैं, जबकि दवाओं और उपकरणों का अभाव आम बात है। ऐसे में विभागीय कर्मचारियों का इस तरह शराब के नशे में धुत होना पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
“ग्रामीण और नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत होना शासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
शराबखोरी जैसी घटनाएँ न केवल अनुशासनहीनता हैं, बल्कि जनता के भरोसे पर भी चोट हैं।” अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है-और क्या वास्तव में ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई कर अन्य कर्मचारियों के लिए सबक बनाया जा सकेगा।
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