अजाक्स संघ ने की दोषियों पर कार्रवाई की मांग
कांकेर:-डाइट कांकेर में पदस्थ एक आदिवासी महिला कर्मचारी के साथ कथित दुर्व्यवहार और गाली-गलौच का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। फर्जी बिल पास करने से इनकार करने पर प्रशिक्षण प्रभारी द्वारा दबाव, अपशब्दों के प्रयोग और स्थानांतरण की धमकी दिए जाने के आरोपों को लेकर अब न्यायिक जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ, जिला उत्तर बस्तर कांकेर द्वारा शुक्रवार को कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन डाइट कांकेर में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 श्रीमती हेमलता वट्टी के आवेदन के आधार पर दिया गया है। संघ ने प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन अपर कलेक्टर जितेंद्र कुमार कुर्रे को सौंपा गया।
फर्जी बिल पास कराने का दबाव बनाने का आरोप
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि डाइट कांकेर में समग्र शिक्षा, शिक्षा विभाग एवं अन्य विभागों के अंतर्गत आयोजित विभिन्न आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान बिल भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं।
आरोप है कि प्रशिक्षण प्रभारी द्वारा बिना नोटशीट एवं उचित दस्तावेजों के बिल पास कराने के लिए दबाव बनाया गया। जब संबंधित महिला कर्मचारी ने नियमों के तहत बिल पास करने से इनकार किया, तो उनके साथ गाली-गलौच, मानसिक प्रताड़ना और स्थानांतरण की धमकी दी गई।
संघ ने आरोप लगाया है कि डाइट कांकेर में पदस्थ व्याख्याता गिरीश गौतम, जो सेवाकालीन प्रशिक्षण प्रभारी हैं, तथा उनकी पत्नी श्रीमती रामेश्वरी गौतम द्वारा अधिकांश प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया जाता रहा है। संघ का कहना है कि पति-पत्नी को एक ही संस्थान में इस प्रकार का प्रभार दिया जाना भी जांच का विषय है। पीड़िता के अनुसार, दोनों द्वारा कथित रूप से फर्जी बिल पास कराने का दबाव लगातार बनाया जा रहा था।
संघ ने इसे केवल एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि एक आदिवासी महिला की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा मामला बताया है। संगठन का कहना है कि नियमों का पालन करना किसी कर्मचारी का अपराध नहीं हो सकता और ऐसे मामलों में दबाव बनाना प्रशासनिक भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। संघ ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराई जाए। यदि जांच में पीड़िता निर्दोष पाई जाती है, तो उसे प्रताड़ित करने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए और उनके विरुद्ध विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला सामने आने के बाद डाइट कांकेर की कार्यप्रणाली और प्रशिक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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