परिजनों और आदिवासी समाज में उबाल-जेल प्रशासन पर उठे सवाल
कांकेर/रायपुर। सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिलाध्यक्ष और जनपद पंचायत चारामा के पूर्व अध्यक्ष जीवन ठाकुर (49) की गुरुवार सुबह लगभग 8 बजे रायपुर सेंट्रल जेल परिसर में उपचार के दौरान मौत हो गई। दो दिन पहले उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान हुई मौत के बाद परिजनों, आदिवासी समाज और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश है।
केंद्रीय जेल रायपुर प्रशासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार जीवन ठाकुर को 02 दिसंबर 2025 को चारामा थाने के अपराध क्रमांक 123/2025 के तहत धारा 420, 467, 468, 34 IPC तथा धारा 340, 318 (4) BNS 2023 में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में उन्हें प्रशासनिक आधार पर कांकेर जेल से रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया।
जेल अधीक्षक के अनुसार 4 दिसंबर की तड़के जीवन ठाकुर की तबीयत अचानक खराब होने पर उन्हें जेल मेडिकल अधिकारी की सलाह पर 4:20 बजे एंबुलेंस से मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया। वहां सुबह 7:45 बजे जांच-पड़ताल की गई। उपचार के दौरान शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
सूत्रों के अनुसार घटना के कई घंटे बाद भी परिजनों को मौत की औपचारिक सूचना नहीं दी गई। इस बात से परिवार और आदिवासी समाज में नाराजगी और गहरा अविश्वास पैदा हो गया है। परिजनों व समाज के पदाधिकारियों का कहना है: मौत संदेहास्पद है, जेल प्रशासन पूरा सच छिपा रहा है, परिजनों को सूचित नहीं करना गंभीर लापरवाही है। इसी कारण मृतक के परिजनों और आदिवासी समाज ने कहा है कि जब तक पारदर्शी जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा:
“एक विचाराधीन कैदी की मौत अपने आप में सवाल खड़े करती है। स्वास्थ्य गिरने के बाद क्या उसे सही समय पर इलाज मिला? परिजनों को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।”
उन्होंने सरकार और प्रशासन से मामले की तत्काल जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कहा: मौत की परिस्थितियाँ स्पष्ट नहीं, मेडिकल रिपोर्ट और जेल रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं, परिजनों की सहमति के बिना कोई अंतिम संस्कार प्रक्रिया न की जाए, मामले की न्यायिक स्तर पर जांच कराई जाए।
कांकेर जिला जेल हाल के महीनों में कई विवादों में रहा है। कुछ कर्मचारियों ने जेलर पर प्रताड़ना और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके चलते जेल प्रशासन पहले ही सुर्खियों में था। अब आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत ने इन विवादों को और उभार दिया है। जेल व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधा, मेडिकल निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता—इन सभी बिंदुओं पर अब सवाल उठ खड़े हुए हैं।
अब पूरा मामला जिला प्रशासन, जेल मुख्यालय और आदिवासी समाज की निगरानी में है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज और जेल रिकॉर्ड का खुलासा इस घटना की दिशा तय करेगा।
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