वोट चोरी’ मुद्दे को लेकर भाजपा-कांग्रेस में टकराव,


कांकेर:- देशभर में ‘वोट चोरी’ को लेकर मचा राजनीतिक बवाल अब छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र तक पहुंच चुका है। मोदी सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस लगातार भाजपा पर हमलावर है। सोशल मीडिया पर “वोट चोर गद्दी छोड़” जैसे नारे वायरल हो रहे हैं, जिससे भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार असहज दिख रही है। विवाद अब कांकेर जिले में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे टकराव का रूप ले चुका है, जहाँ सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को लेकर मामला दर्ज कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि कांकेर जिले के कांग्रेस सोशल मीडिया प्रभारी ने अपने खाते से केंद्रीय गृह मंत्री का वीडियो साझा कर उसमें “वोट चोर गद्दी छोड़” का वीडियो पोस्ट किया गया। इसे भाजपा नेताओं ने अपमान करार दिया। इसके बाद कांकेर ब्लॉक भाजपा अध्यक्ष ने कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने संबंधित वीडियो पोस्ट करने वाले कांग्रेस नेता पर मामला दर्ज करवाया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया और कहा कि भाजपा सरकार सोशल मीडिया पर अपनी विफल नीतियों, भ्रष्टाचार और गलत कार्यों की चर्चा से बौखला गई है। कांग्रेस महासचिव व भानुप्रतापपुर विधायक ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का उपयोग कर विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है, और कहा कि भाजपा सरकार चंद दिनों की मेहमान है-कांग्रेस सत्ता में लौटते ही ऐसे संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई कर बख्सा नहीं जाएगा।
कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा कि सोशल मीडिया पर समाचार चैनलों व सार्वजनिक मंचों पर वायरल वीडियोज़ साझा करना अपराध नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच करने और किसी भी दबाव में आकर FIR दर्ज न करने की अपील की।
दूसरी तरफ भाजपा ने इस विवाद को अपनी प्रतिष्ठा पर हमला बताया और देर रात सांसद समेत कई नेताओं ने कोतवाली पहुँचकर मामला दर्ज करवाया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह व्यक्तिगत अपमान है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार रोकने की मांग की है।
राजनीति की तलवारें खिंच चुकी हैं
इस पूरे घटनाक्रम ने कांकेर की राजनीति में तनाव पैदा कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों को सक्रिय कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर बहस और बयानबाज़ी ने आम जनता का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मामला कितना लंबा खिंचता है और प्रशासन किस प्रकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करता है।
यह विवाद केवल एक वीडियो पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक असहिष्णुता, प्रशासनिक निष्पक्षता और सोशल मीडिया की भूमिका जैसे कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। कांकेर में उठी यह बहस पूरे देश की राजनीति का प्रतीक बनती जा रही है—जहाँ सत्ता और विपक्ष के बीच की तलवारें लगातार खिंच रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन संतुलित भूमिका निभाता है या राजनीतिक संघर्ष और गहराता है।
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