Wednesday, 9 September, 2026
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फर्जी वन अधिकार पट्टों का मामला उजागर, सरकारी जमीन पर कब्जे से ग्रामीणों में आक्रोश
फर्जी वन अधिकार पट्टों का मामला उजागर, सरकारी जमीन पर कब्जे से ग्रामीणों में आक्रोश

फर्जी वन अधिकार पट्टों का खुलासा, शासकीय भूमि पर कब्जे से ग्रामीणों में रोष

रसूखदारों पर कूटरचना से पट्टा बनवाने का आरोप, आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा

कांकेर:- जिला कांकेर के चारामा विकासखंड अंतर्गत ग्राम मयाना (प.ह.नं. 15) में शासकीय चरागाह और वनभूमि पर फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टा जारी किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को दर्जनों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और जांच की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने ग्राम सभा और पंचायत की अनुमति के बिना कूटरचना कर वन पट्टा हासिल कर लिया है। इससे गांव में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और चरागाह के लिए भूमि नहीं बची है।

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मामला ग्राम मयाना के खसरा नंबर 1, 2, 3 और 4 से जुड़ा है, जिनमें जलाशय, भराव क्षेत्र और छोटे-बड़े जंगल शामिल हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन भूमियों का उपयोग वर्षों से पशुओं की चराई के लिए होता रहा है। लेकिन हाल में प्रियांशु पिता सुरेश, प्रतिभा और प्रिंसी सहित अन्य के नाम पर 2.60 हेक्टेयर (ख.नं. 2) और 2.00 हेक्टेयर (ख.नं. 3) भूमि पर फर्जी पट्टा बनवाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक इन फर्जी पट्टों का इस्तेमाल किसान क्रेडिट कार्ड से ऋण लेने और धान खरीदी केंद्र में बिक्री के लिए किया जा रहा है।

सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी में आदिवासी विकास विभाग, कांकेर के सहायक आयुक्त एवं जन सूचना अधिकारी ने अपने पत्र क्रमांक आ.वि./वन अधि/सु.का.अधि/1017/2025 दिनांक 01.07.2025 के जरिए बताया कि खसरा नं. 1, 2, 3, 4 में किसी भी हितग्राही को वन अधिकार पट्टा जारी नहीं किया गया है।

गांव के सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इन फर्जी पट्टों को रद्द कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई है कि भविष्य में ग्राम सभा की अनुमति को अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, जिससे इस तरह की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।

वन अधिकार कानून का उद्देश्य आदिवासी और वनवासी समुदाय को अधिकार देना है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग कर शासकीय जमीन पर कब्जा किया जाता है, तो इससे ग्रामीणों के हक प्रभावित होते हैं और शासन-प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं। ग्राम मयाना का यह मामला प्रशासन के लिए एक चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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About Prakash Thakur

प्रकाश ठाकुर, पेज 16 न्यूज़ के मुख्य संपादक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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