ठेकेदार की लापरवाही, आमजन के लिए खतरे की घंटी

कांकेर:- मानसून आने में अभी लगभग 20 दिन शेष हैं, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र ने प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम की करवट ला दी है। तेज हवाओं और हल्की बारिश के साथ जहां एक ओर लोग राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह बारिश विकास के खोखले दावों और भ्रष्टाचार की सच्चाई को भी उजागर कर रही है।
जिले के कच्चे से अंतागढ़ तक हाल ही में बनी करोड़ों की सड़क कुछ ही बूंदों में धंसने लगी है। सड़क पर बने पुल के आसपास गहरे, जानलेवा गड्ढे उभर आए हैं, जो आने वाले दिनों में दुर्घटनाओं को दावत देने वाले साबित हो सकते हैं। इससे यह स्पष्ट है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गई है।
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का आरोप है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता की लगातार अनदेखी की गई। सड़क की मोटाई से लेकर डामर की परत तक में मानकों की अनदेखी की गई है। कई बार विभाग को शिकायतें दी गईं, लेकिन प्रशासन ने ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की।
गड्ढों और टूटी सड़क की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग #भ्रष्टाचार_की_सड़क और #जनता_का_धोखा जैसे हैशटैग के साथ गंभीर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
सवाल यह है कि यदि मानसून शुरू होने से पहले ही सड़क की यह हालत है, तो बारिश के चरम समय में क्या होगा? क्या विभाग ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
प्री-मानसून की बौछारें केवल मौसम नहीं बदल रही, बल्कि विकास के चेहरे से नकाब भी हटा रही हैं। घटिया सड़क निर्माण केवल भ्रष्टाचार का उदाहरण नहीं, बल्कि आम जनता की जान के लिए एक गंभीर खतरा है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे, वरना यह “विकास” सिर्फ भाषणों तक ही सीमित रह जाएगा।
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